नौकरी से हटाने का आदेश मिलने पर रोती कर्मचारी।
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जिला सहकारी बैंक में मई 2016 में नियुक्त किए गए 26 चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया गया है। बीते दिनों हाईकोर्ट ने अपने निर्णय में सभी 26 कर्मचरियों की नियुक्तियों को निरस्त करने का आदेश जारी किया था। कोर्ट के आदेश के खिलाफ कर्मचारियों ने डबल बेंच में पुनर्विचार याचिका भी दायर की, लेकिन उन्हें राहत नहीं मिली। इतना ही नहीं उक्त कर्मचारियों ने एक बार फिर पुनर्विचार याचिका लगाई थी, लेकिन हाईकोर्ट ने अपना निर्णय बरकरार रखा। आखिरकार प्रदेश के रजिस्ट्रार कोऑपरेटिव ने इन सभी कर्मचारियों की नियुक्ति को निरस्त करने का आदेश जारी कर दिया।
जिला सहकारी बैंक के वर्तमान अध्यक्ष ललित लटवाल ने बताया कि ये नियुक्तियां पूर्व की बोर्ड के कार्यकाल में हुईं थीं। उन्होंने बताया कि निकाले गए कर्मचारियों को जारी नियुक्ति पत्र में स्पष्ट लिखा गया था कि नियुक्ति का आदेश उच्च न्यायालय में दायर विशेष याचिका के अंतिम निर्णय के अधीन होगा।
2015 में शुरू हुई थी नियुक्ति प्रक्रिया
अल्मोड़ा। जिला सहकारी बैंक से निकाले गए चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की नियुक्ति प्रक्रिया 2015 में शुरू हुई थी। नियुक्ति प्रक्रिया शुरू होने के दौरान ही दो अभ्यर्थी ललित प्रसाद और मनोज कुमार ने नियुक्तियों में नियमों की अवहेलना का आरोप लगाते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर कर दी थी। इसके बावजूद नियुक्ति प्रक्रिया चलती रही और मई 2016 में तत्कालीन प्रबंधन ने 26 कर्मचारियों को नियुक्ति पत्र जारी कर दिए थे।
फफककर रो पड़े हटाए गए कर्मचारी
अल्मोड़ा। करीब ढाई साल बाद नौकरी से हटाए जाने पर सभी 26 कर्मचारी सड़क पर आ गए हैं। उनके सामने रोजी-रोटी का संकट पैदा हो गया है। हटाए गए कर्मचारियों में नौ महिलाएं भी हैं। नौकरी से हटाए जाने का आदेश मिलने पर कई महिला कर्मचारी बैंक के अध्यक्ष ललित लटवाल और अन्य अधिकारियों के सामने फफक कर रो पड़ीं।
नियुक्ति के एवज में वसूली गई थी मोटी रकम
अल्मोड़ा। सूत्रों के मुताबिक हटाए गए इन कर्मचारियों में कई से तब नियुक्ति के एवज में मोटी रकम वसूली गई थी। शायद इसीलिए नियमों को भी ताख पर रख दिया गया। जानकारी के मुताबिक हटाए गए कई कर्मचारियों ने बताया कि उन्होंने घूस देने के लिए लोन तक लिया। यह भी पता लगा है कि रिश्वत के खेल में शामिल कुछ लोगों ने इन कर्मचारियों को बैंक से ही ऋण दिलवा दिया। इनमें से कुछ कर्मियों ने दबी जुबान में ये बातें आज रोते-रोते वर्तमान बोर्ड से जुड़े लोगों को भी बताई।