अल्मोड़ा। जिले की सोमेश्वर तहसील में लंबे समय से क्षतिग्रस्त 23 नहरों के जल्द दिन बहुरने की उम्मीद जगी है। सिंचाई विभाग ने इन नहरों को संरक्षित करने के लिए चार करोड़ रुपये का प्रस्ताव शासन को भेजा है। योजना के अस्तित्व में आने से 473 हेक्टेयर भूमि पर किसान अपने खेतों की सिंचाई कर सकेंगे। सोमेश्वर में फल्या, लखनाड़ी, पपेरा, शैलबुंगी, गुरुड़ा, बिजौरिया, चनौदा सहित 23 नहरें रखरखाव के अभाव में जगह-जगह से टूट गईं हैं। इससे किसानों के खेतों तक पानी नहीं पहुंच पा रहा है। सिंचाई विभाग लंबे समय से बदहाल बनी इन नहरों को चार करोड़ रुपये से संरक्षित करेगा। इसके लिए प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजा गया है। इन 23 नहरों की लंबाई 44 किमी है। योजना के धरातल पर उतरने से यहां 473 हेक्टेयर भूमि की सिंचाई हो सकेगी। इससे किसानों को अपने खेतों को सींचने के बारिश पर निर्भर नहीं होना पड़ेगा।
पलायन पर लगेगी रोक
खेतों की सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध नहीं होने से इन क्षेत्रों में कई किसान खेती से मुंह मोड़ चुके हैं। खेती में नुकसान होने पर लोग रोजगार की तलाश में पलायन कर चुके हैं। अगर सूख चुकी नहरों पर फिर पानी चलेगा तो यहां पलायन पर भी रोक लगेगी।
धान के लिए प्रसिद्ध है सोमेश्वर
सोमेश्वर क्षेत्र धान की खेती के लिए प्रसिद्ध है लेकिन यहां किसान धान के साथ ही गेहूं, आलू, हरी सब्जियां, गोभी, बैंगन, शिमला मिर्च, टमाटर, प्याज की भी खेती करते हैं। सिंचाई के पर्याप्त साधन और पानी न होने से किसानों में मायूसी हैं। नहरों का सुधारीकरण होने से उनके लिए सिंचाई आसान होगी।
कोट
सोमेश्वर में 23 क्षतिग्रस्त नहरों के जीर्णोद्धार का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। प्रस्ताव को मंजूरी मिलने पर नहरों का संरक्षण कर किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाया जाएगा। -मोहन सिंह रावत, ईई, सिंचाई खंड, अल्मोड़ा