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सीवर लाइन बनाने को लेकर सरकारें उदासीन

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अल्मोड़ा। प्रदेश में सत्तारूढ़ रहीं सरकारें सालों बाद भी शहर में सीवर लाइन का निर्माण कार्य पूरा नहीं करा सकी हैं। शहर के एक चौथाई हिस्से में ही अब तक सीवर लाइन डाली गई है। पिछले बारह सालों से सीवर लाइन के अधूरे कार्य को पूरा करने के लिए धेला नहीं मिला है। चुनाव के दौरान राजनीतिक दल सीवर लाइन का काम पूरा कराने का भरोसा दिलाते हैं, लेकिन अब तक सीवर लाइन नहीं बन सकी है। समय पर पैसा नहीं मिलने से सीवर लाइन की लागत भी कई गुना बढ़ गई है।
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सीवर लाइन बनाने के लिए अल्मोड़ा शहर को चार जोन में बांटा गया। उत्तर प्रदेश की निर्माण एजेंसी सीएनडीएस ने 2002 में 6.10 करोड़ रुपये की लागत से प्रथम जोन के अंतर्गत राजपुर, मकेड़ी, हीराडुंगरी, एनटीडी, जेल परिसर, और आसपास के क्षेत्रों में सीवर लाइन बिछाई।

इन क्षेत्रों के लोगों को कनेक्शन भी दे दिए गए। इसके बाद 2005 में जल निगम सर्वे शाखा ने 8.10 करोड़ रुपये की लागत से दूसरे चरण में तृतीय जोन का काम प्रारंभ किया। शासन से अवमुक्त 4.46 करोड़ रुपये से निर्माण एजेंसी ने पांडेखोला, कपीना, उप्रेतीखोला, सांई बाबा मंदिर, झिझाड़, गुरुरानीखोला, चंपानौला, खोल्टा मोहल्ले में लाइन बिछाई।
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2007 से कोई पैसा नहीं मिला। इस कारण तीसरे जोन के अंतर्गत थपलिया, जोशीखोला आदि मोहल्लों में सीवर लाइन बिछाने और लोअर मालरोड में रोडवेज वर्कशाप के पास पंप हाउस, पांडेखोला में सीवर ट्रीटमेंट प्लांट निर्माण का काम नहीं हो सका है। वहीं दूसरे और चौथे जोन का भी काम लटका पड़ा है।
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