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धूराफाट के ग्रामीणों ने पेयजल निगम के अधिकारियों को लौटाया बैरंग

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रानीखेत (अल्मोड़ा)। पेयजल संकट को लेकर रानीखेत के सुदूरवर्ती धूूराफाट क्षेत्र के लोगों का आक्रोश थमने का नाम नहीं ले रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि पिछले आठ माह से योजना से पानी नहीं आ रहा है, जिसके चलते भारी परेशानी हो रही है। इस योजना से 10 से अधिक गांव जुड़े हुए हैं। ग्रामीणों का अधिकांश वक्त पानी जुटाने में गुजर जाता है।
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शासन और विभाग पर उपेक्षा का आरोप लगाया गया। किसान विकास संघ धूराफाट के क्रमिक अनशन को भारी जनसमर्थन मिल रहा है। इधर नैनीताल से जल संस्थान के अधिकारी समझाने पहुंचे, लेकिन ग्रामीणों ने उन्हें बैरंग लौटा दिया।

ताड़ीखेत ब्लॉक के मुसोली, मटेला, मयूं, बिल्लेख, बयेड़ी, हिड़ाम, पुनोली सहित तमाम गांवों को पानी मुहैया कराने के लिए एक दशक पहले बनी रीची-थापल पेयजल पंपिंग योजना में पिछले आठ माह से पानी नहीं आ रहा है। ग्रामीण कई बार शासन-प्रशासन से योजना को ठीक करने की मांग कर चुके हैं, लेकिन आज तक सार्थक कार्रवाई नहीं हो पा रही है।
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थक हारकर ग्रामीणों ने सुदूर लोधियाखान महाकाली मंदिर में अब किसान विकास संघ धूराफाट के बैनर तले क्रमिक अनशन शुरू कर दिया है। ग्रामीणों की मांग है कि बिल्लेख में एक लाख लीटर क्षमता का टैंक बने, मैन टैंकों में बराबर पानी पहुंचे, पेयजल लाइन को दो इंच पाइप से जोड़ा जाए, हर गांव तोक में जनसंख्या मानक के अनुरूप स्टेंड पोस्टों की संख्या बढ़ाई जाए।

क्रमिक अनशन पर बैठे ग्रामीणों ने कहा कि पेयजल योजना को सुचारू रूप से चलाया जाए ताकि हर ग्रामीण को पानी मुहैया हो सके। क्रमिक अनशन पर कृपाल सिंह, पूरन पांडे, खुशाल सिंह, कैलाश चंद्र पांडे, महेश चंद्र, निर्मल पांडे, मुकेश पांडे, प्रकाश चंद्र, लीलाधर पांडे, दीप चंद्र नैनवाल, दीप चंद्र नैनवाल, दिवान राम, भुवन राम, जगदीश नैनवाल, सुरेंद्र सिंह फर्त्याल सहित तमाम लोग बैठे। अनशन को समर्थन देने के लिए भारी संख्या में ग्रामीण पहुंचे। इधर, ग्रामीणों को मनाने पहुंचे नैनीताल जल संस्थान के अधिकारियों की भी ग्रामीणों ने एक नहीं सुनी और अधिकारियों को बैरंग वापस लौटना पड़ा।
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