फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

फर्जी अंक पत्रों से पाई थी नौकरी, सात-सात साल की कैद

विज्ञापन
विज्ञापन
अल्मोड़ा। चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट मनमोहन सिंह की अदालत ने फर्जी अंकपत्रों से डाक विभाग में नौकरी पाने वाले दो अभियुक्तों को अलग-अलग धाराओं में सात-सात वर्ष के कठोर कारावास और 16-16 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है।
विज्ञापन


पंकज कुमार पुत्र सुभाष चंद्र निवासी ग्राम बाजन नदीला, पोस्ट देवलधार बागेश्वर ने डाकघर ओखली सिरौद में आठ अगस्त 2011 को ग्रामीण डाक सेवक (डाक वितरक) और गोपाल राम पुत्र स्व. दीवान राम निवासी ग्राम सिमस्यारी थाना झिरोली (बागेश्वर) ने एक अक्तूबर 2011 को इसी डाकघर में ग्रामीण डाक वाहक के पद पर नियुक्ति पा ली। इसके बाद एक व्यक्ति ने डाक विभाग को शिकायत की कि दोनों ने फर्जी अंक पत्रों से नियुक्ति पाई है।

शिकायत पर कोतवाली अल्मोड़ा में दोनों के खिलाफ धारा 420, 467, 468 और 471 में मामला पंजीकृत हुआ। जांच में पुलिस ने पाया कि हिंदी साहित्य सम्मेलन इलाहाबाद से प्रथमा परीक्षा में पंकज कुमार के अंक पत्र में वास्तविक अंक 481 थे। उसने फर्जी अंक पत्र बनाकर अपने नंबर 641 कर लिए। वहीं, गोपाल राम के अंक पत्र में वास्तविक अंक 552 थे। उसने फर्जी अंकपत्र बनाकर अपने अंक 600 कर लिए थे। विवेचना के बाद पुलिस ने दोनों के विरुद्ध न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया। मामला चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट की अदालत में चला।
विज्ञापन


सहायक अभियोजन अधिकारी अरुण गौड़ ने न्यायालय में छह गवाह और 13 दस्तावेज प्रस्तुत किए। न्यायालय में दोनों अभियुक्तों पंकज कुमार और गोपाल राम पर दोष सिद्ध हुआ। न्यायालय ने दोनों को धारा 420 में तीन-तीन साल कठोर कारावास और पांच-पांच हजार रुपये का जुर्माना, धारा 467 में सात-सात वर्ष का कठोर कारावास और पांच-पांच हजार रुपये जुर्माने, धारा 468 में तीन-तीन वर्ष की कैद और पांच-पांच हजार रुपये के जुर्माने, धारा 471 में एक-एक वर्ष के कठोर कारावास और एक-एक हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें