अल्मोड़ा। कांग्रेस जिलाध्यक्ष हटाने के मामले में अब पूर्व विधानसभा अध्यक्ष और जागेश्वर विधायक गोविंद सिंह कुंजवाल ने एक और तीर छोड़ा है। कुंजवाल ने इस झगड़े को पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत और उनके साथ के लोगों के अस्तित्व को बचाने की लड़ाई करार दिया और कहा कि प्रदेश के कुछ नेता उनके सहयोगियों को उनसे लड़ाने का प्रयास कर रहे हैं और इसी के चलते महरा उन पर आरोप लगा रहे हैं। कुंजवाल ने महरा को अपना मित्र भी बताया है।
मंगलवार को कुंजवाल ने बयान जारी कर कहा कि उनका विरोध पार्टी में वरिष्ठ नेताओं के विचारों और अनुभव को दरकिनार किए जाने को लेकर है। यह लड़ाई पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत और उनके साथ जुड़े लोगों के अस्तित्व को बचाने की लड़ाई थी। प्रदेश के आला नेताओं ने जिलाध्यक्ष की लड़ाई दिखाकर लोगों का ध्यान बांटने का काम किया। उन्होंने कहा कि जहां केंद्रीय नेतृत्व हरीश रावत को लगातार बड़ी जिम्मेदारी दे रहा है, वहीं उत्तराखंड के कुछ नेता उन्हें अपमानित करके कांग्रेस को कमजोर करने का काम कर रहे थे।
कुंजवाल ने कहा कि उन्होंने केवल जिलाध्यक्ष यथावत रखने की बात कही थी और उनसे कहा गया कि सब लोग बैठकर जिलाध्यक्ष का चयन करेंगे। अब उन्हें खलनायक के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है। महानगर और जिलाध्यक्षों के चयन में जातीय संतुलन और महिलाओं को स्थान देने की बात प्रमुखता से उठाई थी लेकिन इस बात को तोड़ मरोड़ कर प्रस्तुत करके उनकी छवि तो धूमिल करने का प्रयास किया जा रहा है। इन सब बातों को वह केंद्रीय नेतृत्व के सामने रखने का प्रयास करेंगे। हाल ही में कुंजवाल के विरोध के बाद मोहन सिंह महरा को अल्मोड़ा कांग्र्रेस जिलाध्यक्ष पद से हटाया गया था। इसके बाद महरा ने भी शक्ति प्रदर्शन किया और15 दिन में आंदोलन छेड़ने की चेतावनी दी थी।