अल्मोड़ा। सरस्वती शिशु मंदिर जीवनधाम में हुए अभिभावक सम्मेलन में वक्ताओं ने कहा कि शिशु की प्रथम शिक्षिका मां होती है। मां ही बच्चे के मनोविज्ञान को जानती है। शिशु के विकास के लिए शिक्षक, अभिभावक और शिशु के मध्य तालमेल आवश्यक है। इस मौके पर अभिभावकों के सुझाव भी लिए गए।
अभिभावकों ने विद्यालय व्यवस्था को उत्तम बताया। प्रो. एसएस पथनी ने कहा कि विद्या भारती द्वारा खोले गए शिशु मंदिर भारतीय संस्कृति को बचाने का कार्य कर रहे हैं। वक्ताओं ने कहा कि बच्चों में उत्तम संस्कार होंगे तो वह वर्तमान चुनौतियों का सफलता पूर्वक सामना कर सकता है। प्रतिदिन शिशु के बैग, ड्रेस और स्वच्छता का निरीक्षण करना आवश्यक है।
वक्ताओं में चंद्र सिंह गैड़ा, उपाध्यक्ष गोपाल सिंह सांगा, प्रधानाचार्य भैरव सिंह कार्की शामिल थे। संचालन गिरिजा किशोर पाठक ने किया। इस अवसर पर संजय, अर्जुन बिष्ट, कविता जोशी, ज्योति पथनी, विनोद मनकोटी, प्रेमा तिवारी, निकिता तिवारी, भावना पटेला, रुबी शुक्ला, अंजू चिल्वाल, राधा देवी, हेमा जोशी, शोभा जोशी आदि उपस्थित थीं।