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सड़क बनने के बाद भी नहीं मिल रहा फायदा, ग्रामीणों में रोष

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अल्मोड़ा। धूराफाट के अति दुर्गम गांवों को जोड़ने वाली बसौली झिझाड़-नाई ढौल सड़क पर पुल का निर्माण नहीं हो पाया है। ग्रामीणों का कहना है कि बमुश्किल सड़क बनने के बाद भी आवाजाही के लिए विभाग की ओर से पुल निर्माण का काम नहीं किया जा रहा है। जिससे लोगों को सड़क बनने का कोई विशेष फायदा नहीं हो रहा है। प्रधानों ने विभाग से शीघ्र पुल निर्माण की मांग की है।

ताकुला ब्लाक के धूराफाट के अति दुर्गम गांवों को जोड़ने वाली बसौली झिझाड़-नाई ढौल 2010 में स्वीकृत हुई। लंबा इंतजार करने के बाद इस सड़क पर बड़ी मुश्किल से डामरीकरण हुआ। डामरीकरण के बाद विभाग ने इस सड़क को यूं ही छोड़ दिया। क्षेत्र निवासी और भाजपा युवा मोर्चा के जिलाध्यक्ष महेश नयाल ने बताया कि सड़क पर पुल नहीं होने से नदी पार करना खतरे से खाली नहीं है।
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खासकर बारिश के दिन यह मार्ग पूरी तरह बंद हो जाता है। किरड़ा के प्रधान पदम सिंह, झिजाड़ के मदन सिंह बिष्ट, नाई ढौल के प्रधान वीरेंद्र सिंह, और थपनिया के प्रधान चंदन राम ने विभाग से शीघ्र पुल निर्माण की मांग की है। उनका आरोप है कि सड़क को बगैर पुल के अधूरा ही छोड़ दिया गया है। इस पर सुरक्षा दीवारें, जल निकासी के लिए नालियों की व्यवस्था भी नहीं की है। ग्रामीणों का कहना है कि बसौली मोटर मार्ग से जाने वाली यह सड़क भकूना, थपनिया, सिलंगिया, झिजाड़, किरड़ा, पोखरी, नाई और ढौल तक के कई गांवों को आपस में जोड़ती है। कच्ची और अधूरी सड़क अक्सर दुर्घटनाओं को दावत दे रही है।
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बरसात में इस सड़क पर जगह-जगह पर गड्ढे बन जाते हैं। पूर्व कनिष्ठ प्रमुख महेंद्र नयाल, पूर्व प्रधान नाई ढौल अमर सिंह, पोखरी के पूर्व प्रधान किशन सिंह, देवेंद्र भंडारी ने अतिशीघ्र सड़क मार्ग में पुल निर्माण की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है अगर जल्द पुल निर्माण नहीं हुआ तो ग्रामीण आंदोलन को बाध्य होंगे।
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