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पांच सालों से कागजों में चल रही तहसील धौलछीना और उप तहसील ध्याड़ी

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अल्मोड़ा। जिले में तहसील धौलछीना और उप तहसील ध्याड़ी अस्तित्व में आने के पांच साल बाद भी सिर्फ कागजों में चल रही है। तहसील तथा उप तहसील में कार्मिकों के पद तो सृजित हैं, लेकिन अब तक किसी भी पद पर कर्मचारी की नियुक्ति नहीं हुई है। इस कारण तहसील धौलछीना और उप तहसील ध्याड़ी आज तक अस्तित्व में नहीं आ सकी है। जिले के अन्य 12 तहसील कार्यालयों में भी कर्मचारियों का भारी टोटा बना हुआ है।
24 फरवरी 2014 को धौलछीना तहसील का शासनादेश हुआ था जबकि ध्याड़ी उप तहसील का शासनादेश 23 दिसंबर 2016 को हुआ था। शासनादेश के बाद कागजों में तहसील धौलछीना और उप तहसील ध्याड़ी अस्तित्व में आ गई लेकिन धरातल में आज तक अस्तित्व में नहीं आई हैं। जिससे लोगों को आय प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र, स्थायी निवास प्रमाण पत्र, हैसियत, खाता खतौनी नकल आदि कार्यों अल्मोड़ा और गुरुड़ाबांज जाना पड़ता है। तहसील धौलछीना में तहसीलदार, नायब तहसीलदार, राजस्व लेखाकार, रजिस्ट्रार कानून गो, नायब नाजिर, डाटा इंट्री आपरेटर तथा उप तहसील ध्याड़ी में नायब तहसीलदार, राजस्व लेखाकार, रजिस्ट्रार कानून गो, नायब नाजिर, डाटा इंट्री आपरेटर पद सृजित हैं, लेकिन इन सभी पदों पर अब तक कर्मचारियों की नियुक्ति ही नहीं हुई है। बताया जा रहा है कि धौलछीना तहसील को लेकर सीमांकन का विवाद भी चल रहा है। जिले की अन्य 12 तहसीलों में कनिष्ठ सहायक के 34 पद सृजित हैं जबकि 14 खाली चल रहे हैं। वरिष्ठ सहायक के छह, प्रधान सहायक के नौ, प्रशासनिक अधिकारी का एक, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी का एक पद काफी लंबे समय से रिक्त चल रहा है।
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कोट- जिले की तहसीलों और उप तहसीलों में स्टाफ की कमी बनी हुई है। जिस वजह से तहसील धौलछीना और उप तहसील ध्याड़ी अब तक चालू नहीं हो सकी है। इस संबंध में जानकारी शासन को भेजी गई है। कर्मचारियों के पदों पर नियुक्ति उत्तराखंड अधीनस्थ चयन आयोग के माध्यम से की जाती है। - कैलाश सिंह टोलिया, अपर जिला अधिकारी अल्मोड़ा।
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