अल्मोड़ा। कोसी पुनर्जनन अभियान के पहले चरण में हुए उत्कृष्ट कार्यों के लिए केंद्रीय जल संसाधन नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्रालय भारत सरकार द्वारा इस अभियान को नेशनल वाटर अवार्ड घोषित किए जाने से कोसी पुनर्जनन कार्यक्रम में तेजी आने की उम्मीद है।
अभियान के दूसरे चरण में शुरू होने जा रहे कार्यों की तैयारियां चल रही हैं। इसके लिए कुमाऊं विवि एसएसजे परिसर में स्थित एनआरडीएमएस सेंटर में प्रो. जेएस रावत की देखरेख में माइक्रो मानचित्र तैयार किए जा रहे हैं। नदी के जल संग्रहण क्षेत्र के अंतर्गत निर्धारित 14 जोन के लिए अलग-अलग माइक्रो मैप तैयार हो जाने के बाद मार्च से यांत्रिक कार्य शुरू हो जाएगा।
बता दें कि कोसी पुनर्जनन अभियान का पूरा कार्य एनआरडीएमएस केंद्र के निदेशक प्रो. जेएस रावत की सलाह पर चल रहा है। पहले चरण में मुख्य तौर पर नदी के 14 जोन में पौधरोपण का कार्य हुआ है। दूसरे चरण का कार्य शुरू करने से पहले माइक्रो मानचित्र तैयार किए जा रहे हैं। जिसमें प्रत्येक जोन में ट्रंचिंग होल, चेक डैम, चाल-खाल और अन्य यांत्रिक कार्य के लिए स्थान चिन्हित किए जाएंगे।
इसी माइक्रो मानचित्र के आधार पर दूसरे चरण में मार्च में काम शुरू होंगे। बता दें कि कोसी पुनर्जनन अभियान को संचालित करने के लिए जल संग्रहण क्षेत्र को 14 जोन में बांटकर हर जोन में जिला स्तरीय नोडल अधिकारी की तैनाती की गई है। दूसरे चरण के कार्य भी इन नोडल अधिकारियों की देखरेख में ही होंगे।