एक तरफ प्रदेश सरकार राज्य में शिक्षा व्यवस्था की गुणवत्ता में सुधार लाने की बात कह रही है वही दूसरी तरफ भिकियासैंण विकासखंड में सरकारी शिक्षा व्यवस्था मजाक बनकर रह गई है।
ब्लॉक के सरकारी इंटर कालेज और हाईस्कूल सरकारी उपेक्षा के शिकार हैं। ब्लॉक में नौ राजकीय हाईस्कूलों में प्रधानाध्यापक और नौ इंटर कालेजों में प्रधानाचार्य नहीं हैं। ऐसे में शिक्षा व्यवस्था कैसे सुधरेगी।
तहसील और ब्लाक मुख्यालय भिकियासैंण में राजकीय इंटर कॉलेज और राजकीय बालिका इंटर कॉलेज स्थापित हैं। 2007 में बालिका इंटर कॉलेज का उच्चीकरण हुआ था। तब से आज तक एक भी प्रधानाचार्या की नियुक्ति नहीं हुई है।
इसे इस स्कूल का दुर्भाग्य ही कहा जाएगा कि किसी प्रधानाचार्या की नियुक्ति का आदेश इस स्कूल के लिए हो भी रहा है तो वह ऊंची पहुंच के कारण अन्यत्र नियुक्ति करा ले रही है। जीआईसी भी पिछले लंबे समय से प्रधानाचार्य विहीन चल रहा है जबकि यह स्कूल बोर्ड परीक्षा का संकलन सहित मूल्यांकन केंद्र भी है।
विकासखंड में कुल 13 राजकीय इंटर कॉलेज हैं। इनमें से नौला, विनायक, बिनौली स्टेट, तकुल्टी में ही प्रधानाचार्य है शेष नौ स्कूल प्रधानाचार्य विहीन हैं। यही हाल हाईस्कूलों का भी है। कन्या हाईस्कूल बासोट, भतरौंजखान, सिनौड़ा, जालली समेत नौ राजकीय हाईस्कूल में लंबे समय से प्रधानाध्यापक नहीं हैं।
प्रभारी प्रधानाचार्यों और प्रधानाध्यापकों के सहारे किसी तरह स्कूल चल रहे हैं। अभिभावक समय-समय पर स्कूल में प्रधानाचार्यों की नियुक्ति करने की मांग करते आ रहे हैं, लेकिन अब तक नियुक्ति नहीं हो सकी है।