रानीखेत (अल्मोड़ा)। खाद्य लाइसेंस को लेकर व्यापार मंडल और छावनी सभासद आमने-सामने हो गए हैं। सभासदों का कहना है कि धारा 277 के तहत व्यावसायिक कर वृद्धि और खाद्य लाइसेंस को लेकर उन्होंने बोर्ड की बैठक का बहिष्कार भी किया था। इसके बाद तत्कालीन सीईओ और व्यापार मंडल पदाधिकारियों की आपसी सहमति से छावनी परिषद की दुकानों की दरें तय हुई थीं।
बता दें कि गत दिनों खाद्य सुरक्षा विभाग ने छपा मारकर लाइसेंस नहीं होने पर कई व्यापारियों का चालान भी काटा था। कैंट उपाध्यक्ष मोहन नेगी का कहना है कि इस मामले में सभासदों पर दोष मढ़ना ठीक नहीं है।
कैंट बोर्ड सीईओ को ज्ञापन भेजकर व्यापार मंडल ने कहा था कि पूर्व में व्यापारियों के साथ हुई बैठक में सभासदों ने कैंट एक्ट की धारा 277 के तहत कैंट क्षेत्र में व्यावसायिक कर वृद्धि किए जाने की जानकारी दी और कहा था कि इस कर में खाद्य लाइसेंस का शुल्क भी शामिल होगा।
गत दिनों खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने रानीखेत की दुकानों का निरीक्षण कर खाद्य पदार्थों की सैंपलिंग की तथा खाद्य लाइसेंस नहीं होने पर कई दुकानदारों का चालान तक किया। जिस पर व्यापार मंडल ने कैंट सभासदों की कार्यप्रणाली को कठघरे में खड़ा कर दिया।
कैंट बोर्ड उपाध्यक्ष मोहन नेगी का कहना है कि 2017 में धारा 277 पर चर्चा के लिए व्यापार मंडल की बैठक में जानकारी दी गई थी। व्यापारियों के हित में सभासदों ने तब 10 मार्च को बोर्ड की बैठक का बहिष्कार तक किया। उन्होंने कहा कि अब इस मसले में सभासदों को घसीटना ठीक नहीं