अल्मोड़ा। जिले के काश्तकारों ने पर्वतीय क्षेत्र से हो रहे पलायन पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए ग्राम्य विकास एवं पलायन आयोग के उपाध्यक्ष से गुहार लगाई है। इस संबंध में डीएम के पलायन आयोग के उपाध्यक्ष को ज्ञापन भेजा है और सुझाव भेजकर उन पर अमल करने की मांग की है।
ज्ञापन में कहा गया है कि सरकार ने ग्रामीण क्षेत्र से पलायन पर अध्ययन करने के लिए ग्राम्य विकास एवं पलायन आयोग का गठन किया है। कहा कि आयोग अध्ययन कर पलायन के कारणों पर अंकुश लगाएं। ग्रामीणों का कहना है कि सस्ते गल्ले की दुकानों से खाद्यान्न उपलब्ध कराया जाए। पर्वतीय क्षेत्र में कृषि और पशुपालन मुख्य व्यवसाय है। ग्रामीण काफी मेहतन कर खेती करते हैं, लेकिन सूअर, बंदर, लंगूर आदि जंगली जानवर फसल को चौपट कर रहे हैं। वहीं तेंदुए पशुओं का शिकार कर रहे हैं।
पहाड़ों में रोजगार के साधन बढ़ाने के लिए कच्चे माल पर आधारित उद्योगों की स्थापना की जाए। कई क्षेत्रों में तेंदुए का आतंक बना हुआ है और जनहानि भी पहुंचा चुके हैं। इससे ग्रामीणों में भय व्याप्त रहता है। ग्रामीण इलाकों में शिक्षा, स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाएं नहीं हैं। यह भी पलायन का एक कारण है। कहा कि भांग की खेती पर प्रतिबंध लगाना उचित नहीं है, क्योंकि भांग को जंगली जानवर नुकसान नहीं पहुंचाते हैं वहीं इसके बीज चटनी और सब्जी मशाले के लिए उपयोग में लाए जाते हैं। भांग के रेशे रस्सी समेत अन्य उपयोग में लाए जाते हैं। ज्ञापन भेजने वालों में शिवदत्त पांडे, हेम पांडे, जगदीश राम, गोविंद राम, गिरीश लाल आदि शामिल हैं।