दूध की कम आपूर्ति से दुग्ध संघ को करोड़ों का घाटा
अल्मोड़ा। दुग्ध उत्पादकों की बैठक में वक्ताओं ने दुग्ध क्रय मूल्य बढ़ाने और दुग्ध उत्पादकों को समय से भुगतान करने की मांग की। उन्होंने कहा कि दुग्ध संघ अल्मोड़ा द्वारा दुग्ध उत्पादकों को कम मूल्य देने और समय से भुगतान न कर पाने के कारण दुग्ध उत्पादक दुग्ध समितियों में दूध की आपूर्ति से कतरा रहे हैं, जिससे जिले में कई समितियां बंद हो चुकी हैं। इस कारण दुग्ध संघ में दूध की कम आपूर्ति होने से संघ प्रतिमाह दस लाख रुपये के घाटे में चल रहा है। यह घाटा तीन करोड़ तक पहुंच गया है।
इस पर शीघ्र उपाय नहीं किए गए तो चमोली और श्रीनगर दुग्ध संघ की ही तरह अल्मोड़ा दुग्ध संघ को बंद करना पड़ सकता है। जिससे कई कर्मचारी और कई दुग्ध उत्पादक प्रभावित होंगे। उन्होंने प्रदेश और केंद्र सरकारों से अल्मोड़ा दुग्ध संघ को घाटे से उबारने के लिए तुरंत आर्थिक सहायता देने की मांग की। उन्होंने कहा कि दुग्घ संघ अल्मोड़ा को तीन करोड़ रुपये अनुदान अथवा बिना ब्याज ऋण के रूप में सहायता प्रदान की जाए। उन्होंने कहा कि एक तरफ दुग्ध संघ घाटे की दुहाई देता है वहीं दूसरी ओर दुग्ध संघ में बारी-बारी से बैठने वाले अध्यक्ष अपने-अपने लोगों की दुग्ध संघ में आवश्यकता न होते हुए भी नियुक्ति करते रहते हैं।
उन्होंने भविष्य में इस पर पूरी तरह रोक लगाने की मांग की। यदि दुग्ध संघ में अतिरिक्त कर्मचारी हैं तो उन्हें तुरंत हटाया जाए ताकि घाटे को कम किया जा सके। उन्होंने सरकार की ओर से दुग्ध उत्पादकों को दी जाने वाली प्रोत्साहन राशि का भुगतान जून 2016 से नहीं किए जाने पर नाराजगी जताई। बैठक में ब्रह्मानंद डालाकोटी, शिवराज बनौला, शंकर दत्त, मोहन चंद्र, हीरा बल्लभ, मोहन सिंह, गिरीश चंद्र, नंदन सिंह, पूरन सिंह, मदन राम आदि मौजूद थे।