आखिरकार 2016 भी जाने वाला है और इस साल भी राज्य में मान्यता प्राप्त क्रिकेट एसोसिएशन का गठन नहीं हो सका। उत्तराखंड के साथ ही अस्तित्व में आए झारखंड की क्रिकेट टीम इस बार रणजी ट्राफी के सेमी फाइनल में पहुंच चुकी है, लेकिन 16 साल बाद भी उत्तराखंड की पुरुष-महिला कोई क्रिकेट टीम नहीं है। क्रिकेट एसोसिएशनों में एकता नहीं होने से बीसीसीआई ने राज्य की किसी क्रिकेट एसोसिएशन को मान्यता नहीं दी है। इसका खामियाजा खिलाड़ियों को भुगतना पड़ रहा है और खिलाड़ी उत्तर प्रदेश और अन्य राज्यों की टीमों में अवसर तलाशते हैं। भारतीय महिला क्रिकेट टीम की खिलाड़ी एकता बिष्ट को शुरू में यूपी से खेलना पड़ा। वह अब रेलवे की टीम से खेलती हैं। कुछ अन्य खिलाड़ी भी दूसरे राज्यों से खेल रहे हैं और प्रतिभाएं राज्य से पलायन करने को मजबूर हैं।
उत्तराखंड के गठन को 16 साल पूरे हो गए हैं, लेकिन आज तक यहां सर्वमान्य क्रिकेट एसोसिएशन का गठन नहीं हो सका है। क्रिकेट एसोसिएशनों से जुड़े पदाधिकारी गुटों में बंटे हैं इस कारण उन्होंने यहां शुरू में दो एसोसिएशनों का गठन कर लिया। बताया गया है कि दोनों एसोसिएशनों को राष्ट्रीय स्तर पर भी दो अलग-अलग गुटों का वरद हस्त प्राप्त है। बताया गया है कि बीसीसीआई ने दोनों एसोसिएशनों से एक होकर आपसी सहमति से एक एसोसिएशन गठित करने को कहा, लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद सर्वमान्य क्रिकेट एसोसिएशन नहीं बन सकी है। अब तो राज्य स्तर पर चार एसोसिएशन बन चुकी हैं। राज्य में किसी क्रिकेट एसोसिएशन को मान्यता नहीं मिल पाने का खामियाजा खिलाड़ियों को भुगतना पड़ रहा है। इस वजह से राज्य स्तर पर पुरुष और महिला अंडर-14, अंडर-16, अंडर-19 और अंडर-23 आयु वर्ग सहित मुख्य टीमें ही नहीं बनी हैं। इस साल तो प्रदेश स्तर पर खेल विभाग ने भी विभिन्न आयु वर्गों की क्रिकेट प्रतियोगिताएं नहीं करवाईं।
इसके अलावा एसएसजे परिसर अल्मोड़ा में पढ़ने वाली एक और खिलाड़ी श्वेता वर्मा भी यूपी से खेल रही हैं। हल्द्वानी के सौरभ रावत उड़ीसा से और दीक्षांशु नेगी कर्नाटक की टीम में खेल रहे हैं। भारतीय महिला क्रिकेट टीम की खिलाड़ी एकता बिष्ट के कोच लियाकत अली का कहना है कि एसोसिएशनों से जुड़े पदाधिकारियों को खिलाड़ियों के हितों को देखते हुए आपसी मतभेद खत्म करके जल्द एक सर्वमान्य एसोसिएशन का गठन करना चाहिए।