उत्तराखंड राज्य बनने के 16 साल बाद भी जिले में एक दर्जन से अधिक सरकारी खाद्यान्न गोदामों के अपने भवन नहीं बन सके हैं। एक दर्जन खाद्यान्न गोदाम आज भी किराये के भवन में चल रहे हैं। दूरस्थ क्षेत्रों में स्थित कई गोदामों में बरसात के दिनों में सीलन हो जाती है। जिससे इन गोदामों में रखे गए खाद्यान्न के खराब होने की आशंका बनी रहती है।
जिले में कुल 22 राजकीय खाद्यान्न गोदाम हैं। इनमें से अल्मोड़ा, दन्यां, ध्याड़ी, भनोली, रानीखेत, जाजली, सोनी, बग्वालीपोखर, भतरौंजखान, स्याल्दे, सराईखेत, चौखुटिया स्थित खाद्यान्न गोदाम काफी लंबे समय से किराये के भवन में चल रहे हैं। इनमें से कई गोदामों में काफी सीलन है। इस कारण इन गोदामों में रखा जाने वाला चावल, गेहूं, चीनी आदि के खराब होने की आशंका बनी रहती है। गोदामों में खराब हुआ राशन लोगों के स्वास्थ्य के लिए घातक होता है। खास बात यह है कि जिला मुख्यालय स्थित राजकीय खाद्यान्न गोदाम भी कई सालों से किराये के भवन में चल रहा है। जब जिला मुख्यालय स्थित राजकीय खाद्यान्न गोदाम का भवन नहीं बना है तो दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों में राजकीय खाद्यान्न गोदामों के भवन बनने की तो कोई उम्मीद भी नहीं दिखती।
उत्तराखंड राज्य बने 16 साल हो गए हैं, लेकिन अब तक सरकारी खाद्यान्न गोदामों के भवन बनाए जाने के लिए शासन स्तर पर कोई प्रयास तक नहीं हुए हैं। विभाग में लिपिकों के 12 पद स्वीकृत हैं, लेकिन दस पद लंबे समय से खाली हैं। वरिष्ठ सहायक का एक, सहायक लेखाकार का एक पद रिक्त है। कर्मचारियों की कमी के कारण कामकाज पर भी असर पड़ रहा है।
कोट-
पूर्ति विभाग में कर्मचारियों के रिक्त पदों की सूचना समय-समय पर शासन को दी जाती है। इन पदों पर नियुक्ति शासन स्तर से ही होती है।
टीएन उपाध्याय, जिला पूर्ति अधिकारी अल्मोड़ा।