रानीखेत (अल्मोड़ा)। हजरत कालू सैय्यद बाबा की मजार पर उर्स की शुरुआत कवि सम्मेलन और मुशायरे के साथ हुई। कविताओं के माध्यम से कवियों ने जहां एकता और भाईचारे का संदेश दिया, वहीं उत्तराखंड आंदोलन से जुड़ी यादों को भी ताजा किया। कवि मंजर रामपुरी ने कहा भारत मां के टुकड़े करने की क्यों अब तैयारी है, देश के गद्दारों से कह दो धरती जान से प्यारी है।
हजरत कालू सैय्यद बाबा की मजार पर उर्स की पहली रात मुशायरा और कवि सम्मेलन के माध्यम से बाबा की शान में कसीदे पढ़े गए। कवियों ने कहा ‘मुरादें अपनी पाने को सब चलो रानीखेत, यहां पर हजरत कालू सैय्यद बाबा का दरबार लगता है, जो आता है यहां पर वह झोली भरकर ले जाता है’। ‘चलती नहीं किसी की मुकद्दर के सामने, प्यासा खड़ा हुआ हूं समुंदर के सामने’, ‘क्या हसीं लोग हैं, क्या हसीं रात है, कितनी प्यारी यह मुलाकात है’।
उत्तराखंड आंदोलन के दौरान आंदोलनकारियों में जोश भरने वाली कविता यारो मुछ्याव जगाओ सुनाई। कवि खजान जोशी, फरमान मुरादाबादी, गणेश जोशी, संदीप, जगदीश छाबड़ा, रोली अली खान आदि ने भी रचनाएं प्रस्तुत कीं। खादिम मो. मोहसिन ने सभी का आभार जताया। संचालन आदिल मियां ने किया।