अल्मोड़ा। गर्मी बढ़ते ही डायरिया (दस्त) के मरीजों की संख्या में भी इजाफा हो रहा है। यहां सरकारी अस्पतालों में हर रोज डायरिया से पीड़ित करीब 12 मरीज इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। डायरिया के ज्यादातर मरीज ग्रामीण क्षेत्रों से पहुंच रहे हैं।
जिला महिला अस्पताल की वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डा. प्रीति पंत ने बताया कि डायरिया गंदगी, साफ सफाई का ध्यान नहीं रखने, खुला और बासी भोजन करने आदि से होता है। डायरिया बिगड़ने पर जानलेवा साबित होता है। इसके लिए विशेष ध्यान रखने की जरूरत है। डायरिया छोटे बच्चे से लेकर वृद्ध किसी को भी हो सकता है। अधिकतर लोग बगैर हाथ धोए बाजार में खुला भोजन कर लेते हैं। ग्रामीण इलाकों में भी लोग बासी भोजन करने से नहीं चूकते। जबकि गर्मियों में इस चीज का विशेष ध्यान रखे जाने की जरूरत है।
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डायरिया से बचाव के उपाय
- ओआरएस का घोल प्रत्येक दस्त के बाद पिलाना शुरू कर दें।
- ग्रामीण क्षेत्रों में ओआरएस उपलब्ध ना हो तो नमक चीनी का घोल जरूर पिलाएं।
- पतली खिचड़ी, दाल का पानी या फिर छांछ का सेवन करें।
- दूध पीने वाले बच्चे को मां का ही दूध दें।
- सुधार नहीं होने पर तुरंत चिकित्सक के पास लेकर आएं।