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जो रहने लायक नहीं था उसी भवन में शुरू कर दीं कक्षाएं

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धौलछीना(अल्मोड़ा)। शिक्षा के प्रति सरकार की गंभीरता का जीता-जागता उदाहरण बाडेछीना पॉलीटेक्निक का जर्जर भवन है। राजकीय पॉलीटेक्निक बाड़ेछीना पिछले चार साल से इंटर कालेज के जर्जर हो चुके स्टाफ क्वार्टरों में संचालित हो रहा है। संस्थान में शिक्षकों के पद रिक्त होने के कारण प्रशिक्षणार्थियों को कठिनाई का भी सामना करना पड़ रहा है।
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क्षेत्रीय जनता की मांग और पूर्व विधायक मनोज तिवारी के प्रयासों से 2014 में तत्कालीन मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने विकासखंड भैंसियाछाना के बाड़ेछीना में पॉलीटेक्निक खोलने की घोषणा की थी। इलेक्ट्रिकल और मैकेनिकल टेड्र स्वीकृत होने के साथ उसी दौरान जुलाई में पॉलीटेक्निक को इंटर कालेज बाड़ेछीना के चार कमरों में शुरू कर दिया गया। वर्षों पहले जर्जर हो चुके जिस भवन को इंटर कालेज का स्टाफ रहने लायक नहीं मान कर छोड़ चुका है उन खस्ताहाल भवनों में देश का भविष्य संवारा जा रहा है।

बारिश के दिनों में पानी कमरों में आ जाता है। सफाई भी नहीं है और बच्चों के पीने के पानी की कोई व्यवस्था नहीं है। दूसरी ओर लैब में प्रयाप्त मशीनों के अभाव में बच्चों के प्रैक्टिकल प्रभावित हो रहे हैं। वर्तमान में यहां दोनों टेड्रों में 95 छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं।
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