अल्मोड़ा। पहाड़ घूमने आने वाले पर्यटकों को हमेशा से ही प्राकृतिक वातावरण भाता रहा है। इसमें चिड़ियाघर भी शामिल है जहां प्राकृतिक आवासों में रह रहे विभिन्न प्रकार के जानवरों को देखने पर्यटक भारी संख्या में उमड़ते हैं। नगर के एनटीडी स्थित मृग विहार में भी मिनी जू का सपना लंबे समय से पूरा नहीं हो पा रहा है। सेंट्रल जू अथारिटी ने अभी तक मिनी जू के लिए मान्यता का पत्र नहीं दिया है। बल्कि इस बार जू अथारिटी की ओर से मिनी जू के चारों ओर फेंसिंग और सीमेंट की ऊंची दीवार का निर्माण कराने के निर्देश दिए गए हैं।
नगर से लगभग दो किमी दूर एनटीडी मृग विहार में मिनी जू बनाने की तैयारी पिछले कई सालों से चल रही है। 38 हेक्टेयर क्षेत्रफल में फैले विहार में मिनी जू बनाने के लिए सिविल सोयम विभाग ने सेंट्रल जू अथारिटी को आवेदन करने के साथ ही कई बार पत्र व्यवहार भी कर दिया है, लेकिन प्रस्ताव में खामियों की वजह से जू अथारिटी मान्यता नहीं दे रही है। 540.60 करोड़ की लागत से बनने वाले मिनी जू के लिए इस बार सेंट्रल जू अथारिटी ने वन विभाग को नया निर्देश दिया है। जिसमें प्रस्तावित मिनी जू के चारों ओर फेंसिंग करने के अलावा सीमेंट की ऊंची दीवार का निर्माण किए जाने को नियमों के अनुसार आवश्यक बताया गया है। इसके अलावा मिनी जू में बाउंड्री वाल, सेनिटेशन, विजिटर्स मार्ग, स्टोर फैसेलिटी, पानी की व्यवस्था, जानवरों के लिए नाइट सल्टर, परिंदों के लिए इनक्लोजर, मगरमच्छ के लिए तालाब, मेडिकल उपकरण, दवाइयों की उपलब्धता भी सुनिश्चित की जानी हैं। वर्तमान में मृग विहार में करीब 94 से अधिक जानवर हैं। जिनमें सांभर, चीतल, सफेद बंदर, तेंदुए, भालू, काकड़ के अलावा विभिन्न प्रजाति के पक्षी भी शामिल हैं। मिनी जू बनने के बाद यहां पर्यटकों की संख्या में भी काफी इजाफा होने की उम्मीद है। डीएफओ, सिविल सोयम आरसी शर्मा ने बताया कि सेंट्रल जू अथारिटी ने फेंसिंग आदि बनाने के कुछ सुझाव दिए हैं। इस मद में पैसा भी नहीं मिला है। बजट और स्वीकृति मिलने के बाद ही मिनी जू तैयार हो सकेगा।