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बच्चों से बाल श्रम कराने पर मिल सकती है कड़ी सजा: डा. चंद्र

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अल्मोड़ा। नेशनल प्लान ऑफ एक्शन के तहत सीएमओ कार्यालय में आयोजित विधिक जागरूकता साक्षरता शिविर में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव डॉ. शेष चंद्र ने कहा कि बाल श्रम जघन्य अपराध है। यदि किसी बालक से किसी भी फैक्ट्री, मालिक या दुकानदार या किसी रिश्तेदार, अन्य द्वारा श्रम कराया जाता है तो कानूनन वह कड़ी सजा के भागीदार होंगे। उन्होंने कहा कि विवाह के लिए बालक, बालिका की आयु क्रमश: 18, 21 वर्ष होनी चाहिए। इससे कम उम्र में विवाह करना कानूनन अपराध है। कम उम्र में विवाह करने पर माता, पिता, संरक्षक अथवा पंडित को कड़ी सजा देने का प्रावधान है। उन्होंने कहा कि कम उम्र में विवाह करने से गर्भाधान में वृद्धि, समय से पहले प्रसव की अधिक घटनाएं, माताओं की मृत्यु दर में वृद्धि, घरेलू हिंसा, लिंग आधारित हिंसा आदि कुप्रभाव सामने आते हैं। समय पर मजिस्ट्रेट के पास व्यक्ति स्वयं अथवा किसी रिश्तेदार, दोस्त के माध्यम से सूचना देकर बाल विवाह को रोका जा सकता है। बाल विवाह से संबंधित मामलों की याचिका संबंधित जिला न्यायालय में दी जा सकती है। उन्होंने बताया कि किशोर अपराधी को पकड़ने पर जेल नहीं भेजा जा सकता बल्कि उन्हें संप्रेक्षण गृह में भेजा जाता है। उन्होंने बताया कि पॉक्सो अधिनियम के तहत विशेष न्यायालय का गठन किया जाता है। इसमें अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश अथवा जिला जज रैंक के अधिकारी होते हैं। सीएमओ डॉ. निशा पांडे ने कहा कि रोग, दुर्बलता का उपचार शारीरिक, मानसिक तरीकों से अच्छी तरह से किया जा सकता है। डॉ. आरसी पुरोहित ने संचालन किया। इस दौरान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा प्रदत्त 550 कानूनी ज्ञानमाला पुस्तकें बांटी गईं। वहां पैरा लीगल वालंटियर हरीश चंद्र, विनीता आर्या, लक्षिता बिष्ट, भावना तिवारी, शुभम आर्या, कैलाश चंद्र, नीता नेगी, सुनीता रानी, भावना आर्या, नीमा बिनवाल, जानकी कांडपाल, अरुणेंद्र राज तिवारी, धीरेंद्र सिंह रावत आदि थे।
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