अल्मोड़ा। नेशनल प्लान ऑफ एक्शन के तहत पुलिस लाइन अल्मोड़ा में आयोजित विधिक जागरूकता साक्षरता शिविर में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव डॉ. शेष चंद्र ने सरकार द्वारा चलाई जा रहीं विभिन्न योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि नशा एक खतरनाक बीमारी है । अक्सर देखा गया है कि नशे की प्रवृति के कारण बाल विवाह और छोटी बालिकाओं के शारीरिक और लैंगिग शोषण की घटनाओं में इजाफा हो रहा है। इन घटनाओं को रोकने के लिए जांच एजेंसियों को लोगों को नशा छोड़ने के लिए प्रेरित करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि विद्यालयों के प्रधानाचार्यों और प्रबंधकों से छात्रों में नशाखोरी रोकने के लिए सुझाव मांगे जाने चाहिए। नशे की बढ़ती प्रवृति पर अंकुश लगाने के लिए जिले की जांच एजेंसियों को सख्त कार्रवाई करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि नशा एक खतरनाक बीमारी है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड राज्य का अधिकतर क्षेत्र वनों से घिरा हुआ है।
पर्वतीय क्षेत्र में रोजमर्रा के जीवन में वनों का विशेष महत्व है। उन्होंने वनों की सुरक्षा के लिए बनाए गए कानून भारतीय वन अधिनियम 1927, वन संरक्षण अधिनियम 1980, वन्य जीव संरक्षण अधिनियम 1972, पशु अतिचार अधिनियम 1971 के विषय में जानकारी दी। पुलिस उपाधीक्षक आरएस टोलिया ने मानव अधिकारों के बारे में जानकारी दी। इस मौके पर पैरा लीगल वालियंटर्स विनीता आर्या, लक्षिता बिष्ट, भावना तिवारी, सुभम आर्या, कैलाश चंद्र, नीता नेगी, सुनीता रानी, भावना आर्या, नीमा बिनवाल, जानकी कांडपाल, आशा लोहनी, हेमा लोहनी, धीरेंद्र सिंह रावत आदि मौजूद थे। इस अवसर पर राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा प्रदत्त 500 कानूनी ज्ञान माला पुस्तकों का वितरण किया गया।