अल्मोड़ा। कपकोट के बास्ती गांव में फूड प्वाइजनिंग की घटना ने पहाड़ की बदहाल स्वास्थ्य सेवाओं की भी पोल खोल दी है। हालात ये हैं कि पहाड़ के अस्पतालों में फूड प्वाइजनिंग से निपटने तक के उपाय नहीं हैं। डॉक्टरों की संख्या संयुक्त उत्तर प्रदेश के समय से भी कम हो चुकी है। पहाड़ के चार जिलों में डॉक्टरों के 40 प्रतिशत से अधिक पद खाली हैं। कुछ जिला मुख्यालयों के अस्पतालों में फिजीशियन, हड्डी रोग विशेषज्ञ तक नहीं हैं। तहसील और ब्लॉक स्तर के अस्पतालों में रक्त की जांच और एक्स-रे तक नहीं हो पाते।
ये अस्पताल रेफरल सेंटर बने हुए हैं। चार जिलों के किसी भी जिले में कोई ट्रॉमा सेंटर काम नहीं कर रहा है। पहाड़ के किसी अस्पताल में सीटी स्कैन और डायलिसिस की सुविधा भी नहीं है।
हाल में डॉक्टरों की तैनाती के बावजूद स्थिति यह है कि अल्मोड़ा जिले में 273 पदों में से 103 पद खाली हैं। जिला मुख्यालय के किसी अस्पताल में फिजीशियन नहीं है। पिथौरागढ़ में 186 पदों में से 109 पर डॉक्टर कार्यरत हैं और 77 पद रिक्त हैं। चंपावत और बागेश्वर जिलों में
डॉक्टरों के 97 में से 45-45 पद खाली हैं। जिला मुख्यालय के अस्पतालों में न्यूरोलॉजिस्ट, न्यूरोसर्जन, कार्डियोलॉजिस्ट सहित विशेषज्ञ डॉक्टरों के अधिकांश पद खाली हैं। अल्मोड़ा के जिला महिला अस्पताल में भी महिला डॉक्टरों के चार पद खाली हैं। बागेश्वर जिले में डॉक्टरों के 97 पद सृजित हैं इनमें से 52 पद खाली चल रहे हैं।
यहां जिला मुख्यालय के अस्पतालों में हड्डी रोग विशेषज्ञ तक नहीं है। इसके अलावा हृदय रोग विशेषज्ञ, न्यूरो सहित अधिकांश विशेषज्ञ डॉक्टरों का अभाव है। कपकोट में हालत और बदतर है। वहां के सीएचसी में एक्स-रे तक नहीं हो पाते हैं। तहसील क्षेत्र के लोगों के अल्ट्रासाउंड करने के लिए सप्ताह में एक दिन डॉक्टर बागेश्वर से भेजा जाता है। कांडा, गरुड़ आदि इलाकों के हाल भी लगभग ऐसे ही हैं।
चंपावत के किसी भी अस्पताल में स्त्री रोग विशेषज्ञ नहीं होने से सबसे ज्यादा मुश्किल गर्भवती महिलाओं को हो रही है। टांण राजकीय एलोपैथिक अस्पताल दो साल से एकमात्र वार्ड ब्वाय के सहारे है। पिथौरागढ़ जिला अस्पताल में भी विशेषज्ञ डॉक्टरों समेत डॉक्टरों के 12 पद खाली हैं। ब्लॉक मुख्यालयों में स्थित पीएचसी और सीएचसी में सुविधाओं के नाम पर एक्स-रे भी नहीं हो पाते। पहाड़ के सभी जिलों में ब्लॉक और तहसील स्तर के अधिकांश अस्पतालों में मरीजों के रक्त की जांच, एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड तक की तक सुविधा नहीं है। रोगियों को सामान्य सी जांच के लिए भी जिला मुख्यालय की दौड़ लगानी पड़ती है। कई बार दूरस्थ क्षेत्र के मरीज इलाज के अभाव में दम तोड़ देते हैं।