अल्मोड़ा। गायत्री परिवार का चितई गोलू मंदिर में पशु बलि के खिलाफ जनजागरण अभियान जारी है। दो श्रद्धालु परिवार दो-दो बकरियां बलि के लिए लाए थे। जिन्हें गायत्री परिजनों के लौटा दिया। गायत्री परिजनों ने लोगों को अवगत कराया कि उच्च न्यायालय के आदेश पर मंदिरों में पशु बलि पर पूर्ण रोक है। उन्होंने इसे कुप्रथा बताते हुए भक्तों से मंदिर में पशु बलि के लिए बकरियां नहीं लाने की अपील की।
सुपई (बाड़ेछीना) के हरीश सिंह और बमनखोला (द्वारसों) के हरीश सिंह परिजनों के साथ दो-दो बकरियां लेकर आए थे। गायत्री परिजनों ने उन्हें उच्च न्यायालय के आदेश का हवाला दिया। इसके बाद यह दोनों परिवार बकरियां वापस ले गए। जनजागरण के दौरान गायत्री परिजनों ने श्रद्धालुओं से सात्विक विधि से पूजा अर्चना करने का आह्वान किया। गायत्री परिजनों ने बताया कि अभियान का डाना गोलू की डंगरिया नीमा आार्य ने भी समर्थन किया है।
गायत्री परिजन मंजू तिवारी ने कहा कि अधिकांश लोग मनोकामना पूर्ण होने पर अब सात्विक विधि से पूजा कर रहे हैं। मनौती पूर्ण होने पर पशु बलि की कोई आवश्यकता नहीं है। पशुबलि कुप्रथा है। अभियान में सरोजनी मेलकानी, विद्योतमा जोशी, दीपा जोशी, मीनाक्षी भट्ट, चंद्रकला रौतला, मंजू तिवारी, निर्मला अधिकारी, मंजू जोशी, सौम्या भट्ट, संस्कृति अधिकारी, कार्तिक भट्ट आदि शामिल हुए।