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सरकारें स्वयं लगा रही स्वच्छता अभियान को पलीता

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अल्मोड़ा। देश और प्रदेश में स्वच्छ भारत अभियान जोरशोर से चल रहा है। सरकारें और जनप्रतिनिधि स्वच्छता को लेकर अभियान चलाने के साथ ही कई घोषणाएं भी कर रहे हैं, लेकिन सांस्कृतिक नगरी अल्मोड़ा में बीस साल बाद भी सीवर लाइन का काम पूरा नहीं हो सका है। करीब एक चौथाई हिस्से में ही सीवर लाइन बिछी है, शेष तीन चौथाई हिस्से में सीवर लाइन अब तक नहीं बिछाई जा सकी है। सीवर लाइन नहीं होने पर कई लोग गंदगी नालियों में बहा देते हैं।
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पालिका क्षेत्र में लगभग 70 हजार आबादी निवास करती है। राज्य बनने के बाद 2002 में शहर में सीवर लाइन बिछाने का कार्य प्रारंभ हुआ। इसके लिए शहर को चार जोन में बांटा गया। प्रथम चरण में 6.10 करोड़ रुपये से पहले जोन में शामिल किए हीराडुंगरी, एनटीडी, जेल परिसर, राजपुर, मकेड़ी में सीवर लाइन बिछाई और इन क्षेत्रों में लोगों को कनेक्शन दिए गए। दूसरे चरण में तृतीय जोन का 2005 में काम प्रारंभ हुआ। जल निगम सर्वे शाखा ने इस जोन में सीवर लाइन बिछाने का काम प्रारंभ किया। सरकार से 8.10 करोड़ के विपरीत 4.85 करोड़ रुपये मिले। पांडेखोला, कपीना, उप्रेतीखोला, चंपानौला, खोल्टा साईं बाबा मंदिर, झिझाड़, गुरुरानीखोला मुहल्लों में लाइन बिछाई गई पर वर्ष 2007 के बाद से शेष पैसा नहीं मिलने से इस जोन के शेष हिस्सों जोशीखोला, थपलिया आदि में सीवर लाइन नहीं पड़ सकी।

लोअर मालरोड में रोडवेज के पास पंप हाउस और पांडेखोला में सीवर ट्रीटमेंट प्लांट नहीं बन सका। इसके अलावा दूसरे और चौथे जोन का कार्य शुरू ही नहीं हुआ है। सीवर लाइन के अभाव में शहर में कई लोग घरों की गंदगी नालियों में बहा देते हैं। ऐसे लोगों पर पालिका और प्रशासन भी अंकुश नहीं लगा पा रहा है।
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