अल्मोड़ा। पुरातत्व विभाग अगस्त पहले सप्ताह से कुमाऊं के पुरातात्विक महत्व के मंदिरों और स्मारकों की डाक्यूमेंट्री फिल्म बनाने जा रहा है। ड्रोन कैमरे से बनाए जाने वाली इस फिल्म में मंदिर के पुरातात्विक, सांस्कृतिक, धार्मिक महत्व की जानकारी भी शामिल होगी। पहले चरण में अल्मोड़ा के चयनित मंदिरों की फिल्म बनेगी। फिल्म बनाने का काम भारतीयम प्रोडक्शन फिल्म लखनऊ और मुंबई की टीम द्वारा किया जाएगा।
संस्कृति, पर्यटन और पुरातत्व विभाग ने ऐतिहासिक और पुरातात्विक महत्व के मंदिरों की डाक्यूमेंट्री फिल्म बनाने की तैयारी पूरी कर ली है। जिसमें सबसे पहले अल्मोड़ा के मंदिरों की डाक्यूमेंट्री फिल्म बनेगी। इसके लिए ऐतिहासिक और पुरातात्विक महत्व के अल्मोड़ा के पांच मंदिरों को चुना गया है। इनमें अल्मोड़ा में नंदादेवी मंदिर, पाताल देवी मंदिर, पेटशाल मार्ग पर स्थित श्रीराम मंदिर-नारायण काली, पिठौनी में स्थित मुंडेश्वर महादेव मंदिर और प्राचीन चित्राश्रय-शैलाश्रय लखुडियार शामिल हैं।
डाक्यूमेंट्री फिल्म में पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण स्थान के साथ ही मंदिर के पुरातात्विक, सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व की जानकारी भी होगी। भारतीयम प्रोडक्शन लखनऊ और मुंबई की टीम डाक्यूमेंट्री फिल्म का फिल्मांकन करेगी। क्षेत्रीय पुरातत्व अधिकारी चंद्र सिंह चौहान ने बताया कि डाक्यूमेंट्री फिल्मांकन का कार्य अगस्त पहले सप्ताह से शुरू होगा।
ड्रोन कैमरे में कैद रहेगा मंदिर के चारों ओर का परिदृश्य
अल्मोड़ा। मंदिरों की डाक्यूमेंट्री फिल्म बनाने के लिए मैनुअल कैमरों के साथ ही ड्रोन कैमरे का भी प्रयोग होगा। जिससे मंदिर के चारों ओर का पूरा परिदृश्य कैमरे के सामने मौजूद रहेगा। भविष्य में मंदिर के आसपास के 100 मीटर परिधि में अगर कोई निर्माण होता है तो उस पर भी विभाग नजर रख सकेगा और निर्माणकर्ता यह दावा नहीं कर पाएगा कि यह निर्माण पहले से ही था। मालूम हो कि पुरातात्विक नियमावली में ऐतिहासिक और पुरातात्विक महत्व के मंदिरों के आसपास 100 मीटर परिधि में निर्माण कार्य प्रतिबंधित है। ऐसा होने पर विभाग द्वारा संबधित के खिलाफ कार्रवाई की जाती है।