अदरक तथा हल्दी का बीज प्राप्त करते चयनित गांवों के किसान।
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गोविंद बल्लभ पंत राष्ट्रीय हिमालयी पर्यावरण और सतत विकास संस्थान कोसी कटारमल में राष्ट्रीय हिमालयी अध्ययन मिशन के अंतर्गत चलाई जा रही परियोजना के अंतर्गत हवालबाग ब्लॉक के छह चयनित गांवों के किसानों को बंजर भूमि में नकदी फसलों के उत्पादन के लिए प्रेरित किया गया।
हवालबाग ब्लॉक के छह चयनित गांवों सकार, ग्वालाकोट, ज्यूला, तिलौरा, सकनियाकोट, भेलगाड़ में बंजर पड़ी कृषि योग्य भूमि विकास के लिए 203 काश्तकारों को 12 क्विंटल अदरक और दस क्विंटल हल्दी का बीज वितरित किया गया। परियोजना की शोध टीम ने पाया कि बंदरों और जंगली सुअरों के आतंक से फसलों को होने वाले नुकसान के कारण लोग खेती करना छोड़ रहे हैं। इसको ध्यान में रखते हुए चयनित गांवों में बंजर भूमि विकास के लिए बनाई गई योजना के तहत नगदी फसलों हल्दी और अदरक को उगाया जा रहा है। अब तक परियोजना में 400 ग्रामीणों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। परियोजना के तहत पिछले दो वर्षों से चयनित गांवों बंजर भूमि के विकास के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। ग्रामीणों को बंजर भूमि में नकदी फसलों के उत्पादन करने के लिए लगातार प्रोत्साहित किया जा रहा है। इस मौके पर परियोजना में कार्यरत डॉ. देवेंद्र चौहान, डीएस बिष्ट, मुकेश देवराड़ी, नरेंद्र मेहता, गजेंद्र सिंह, जगदीश भोजक, मनोज बिष्ट, महिला हाट संस्था समन्वयक राजेंद्र कांडपाल आदि मौजूद थे।