अल्मोड़ा। जिला विधि सेवा प्राधिकरण द्वारा जिला कारागार में विधिक जागरूकता शिविर लगाया गया। प्राधिकरण के सचिव योगेंद्र कुमार सागर ने कारागार का निरीक्षण किया और कारागर के पैनल अधिवक्ताओं के कार्यों की समीक्षा भी की।
प्राधिकरण सचिव ने बंदियों को प्ली बारगेनिंग विषय पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि प्ली बारगेनिंग एक स्वैच्छिक प्रक्रिया है। इसमें आरोपी अपने अपराध को अपनी मर्जी से स्वीकार करता है। दोनों पक्षों के बीच होने वाला समझौता अदालत की देखरेख में होता है।
समझौते के बाद मजिस्ट्रेट के सम्मुख आरोपी गुनाह कुबूल करता है। आरोपी की सजा उस केस की न्यूनतम सजा से आधी या उससे भी कम कर दी जाती है। इसमें गलती अथवा आवेश में हुए अपराध के कारण अपराधी सजा से बच जाता है। सजा कम करवाकर शिकायतकर्ता से समझौता करके समाज में एक अच्छा वातावरण बनता है।
प्ली बारगेनिंग की खासियत यह है कि इसमें दो से तीन तारीखों में दोनों पक्षों के बीच समझौता होकर केस निपट जाता है। प्ली बारगेनिंग के कुछ मामलों को छोड़कर सात साल तक की सजा वाले मामलों को निपटाया जा सकता है।
प्राधिकरण सचिव ने बंदियों की समस्याएं सुनीं। बाद में उन्होंने कारागार और लीगल एंड क्लीनिक का निरीक्षण किया। बंदियों से खानपान, बिजली, पानी, टीवी आदि सुविधाओं और मेडिकल के बारे में जाकनकारी ली। डॉ. अंकुर सिंह ने बंदियों को दी जा रही स्वास्थ्य सुविधाओं के बारे में बताया। इस मौके पर अधिवक्ता महेश चंद्र सिंह परिहार, प्रमोद कुमार, तुलसी जौहरी, गजेंद्र सिंह मेहता, हिमांशु मेहता आदि भी थे। उन्होंने कारागार अधीक्षक मेघराज सिंह को जेल विजिटरों के कार्य दिवसों में बंदियों की समस्याओं के निराकरण के निर्देश दिए।