अल्मोड़ा। सेवायोजन विभाग में पंजीकृत युवाओं को सरकारी नौकरी मिले या ना मिले, लेकिन विभाग की ओर से आयोजित होने वाले रोजगार मेले प्राइवेट सेक्टर में जॉब दिलवाने में काफी कारगर सिद्ध होते हैं। नियमानुसार प्रत्येक जिले में वर्षभर में 48 छोटे और चार बड़े रोजगार मेले आयोजित किए जाते हैं, लेकिन यहां तो मंडल के छह जिलों में साल भर में केवल 51 छोटे और चार बड़े मेले ही आयोजित हुए हैं। इनमें भी ऊधमसिंनगर, अल्मोड़ा और बागेश्वर में एक भी बड़ा मेला आयोजित नहीं हो पाया।
जबकि छह जिलों में साल भर में 288 छोटे और 24 बड़े मेलों का आयोजन किया जाना था। दूसरी ओर अल्मोड़ा और ऊधमसिंह नगर में सेवायोजन अधिकारी का पद भी लंबे समय से खाली चल रहा है। एक मात्र मंडलीय अधिकारी के जिम्मे 19 कार्यालयों की जिम्मेदारी सौंप दी गई है। जिससे रोजगार मेले भी प्रभावित हो रहे हैं।
सेवायोजन विभाग में अधिकारी ही नहीं हैं। पिथौरागढ़ के सेवायोजन अधिकारी वाईएस रावत वर्तमान में मंडलीय अधिकारी भी हैं और अकेले अल्मोड़ा, पिथौरागढ़, नैनीताल, बागेश्वर, चंपावत और ऊधमसिंहनगर में नियंत्रक अधिकारी का दायित्व संभाल रहे हैं। रावत इसके अलावा छह जिलों में 19 कार्यालयों का प्रभार भी देख रहे हैं। वहीं अल्मोड़ा में 2016 से और ऊधमसिंह नगर में एक साल से सेवायोजन अधिकारी का पद खाली है। एक अधिकारी पर सारी जिम्मेदारी बेरोजगार युवाओं पर भारी पड़ रही है। जिससे रोजगार भर्ती मेले भी प्रभावित हो रहे हैं। साल भर में छह जिलों के केवल 3340 युवाओं को ही प्राइवेट सेक्टर में रोजगार मिल पाया है।