अल्मोड़ा। प्रसिद्ध विज्ञान कथाकार देवेंद्र मेवाड़ी ने कहा कि शिक्षा की मजबूती के लिए शिक्षकों को वैज्ञानिक सोच के साथ शिक्षण कार्य करना चाहिए। साथ ही समय-समय पर बच्चों को निरंतर प्रोत्साहित एवं प्रेरित करें। बच्चों को विज्ञान का बेहतर ज्ञान होना चाहिए। जिला शिक्षा तथा प्रशिक्षण संस्थान डायट में आयोजित पांच दिवसीय मूल्य आधारित शिक्षा से संबंधित कार्यशाला के समापन समारोह को मेवाड़ी बतौर मुख्य वक्ता संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि अल्मोड़ा शिक्षाविदों का नगर रहा है। रवींद्रनाथ टैगोर ने विश्व परिचय और गीतांजलि की रचना अल्मोड़ा में रहकर ही की और नोबेल पुरस्कार प्राप्त किया। वर्ष 1902 में नोबेल पुरस्कार विजेता रोनाल्ड रास का जन्म भी अल्मोड़ा में हुआ था। उन्होंने मलेरिया परजीवी की खोज की थी। उन्होंने शिक्षकों से वैज्ञानिक सोच से शिक्षण कार्य करने का आह्वान किया।
डायट प्रवक्ता गोपाल सिंह गैड़ा ने कहा कि बच्चों को सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करना चाहिए। अजीम प्रेम जी फाउंडेशन के डॉ. दीवान नगरकोटी ने कहा कि वैज्ञानिक सोच के साथ समतामूलक समाज की स्थापना के लिए आगे आने की आवश्यकता है। डॉ. धाराबल्लभ पांडे ने कहा कि परिवार प्रथम पाठशाला होती है। माता-पिता और विद्यालय में दिए गए संस्कार जीवन भर साथ रहते हैं। डॉ. विनोद चंद्र लोहनी ने वर्तमान शिक्षा प्रणाली के मूल्यों में आ रही गिरावट पर चिंता जताई। डायट के प्रभारी प्राचार्य जीजी गोस्वामी ने कहा कि देवेंद्र मेवाड़ी का विज्ञान लेखन अनुकरणीय है।
डॉ. धाराबल्लभ पांडे ने देवेंद्र मेवाड़ी को स्व रचित 22,500 वर्षीय कलेंडर और पुस्तकें प्रदान की। इस दौरान डॉ. शशि जोशी, दीपा तिवारी, कृपाल शीला, हिमेश्वर गंगवार, कविता जंगपांगी, अनीता तिवारी, मीनाक्षी बिष्ट, लता भोज, रेखा जोशी, रंजना जोशी, कुलदीप राणा, कल्याण सिंह, पूनम वर्मा, गोकुल दुर्गापाल, विनीत कुमार, राजू महर, डॉ. हरीश जोशी, डॉ. सरिता पांडे, डॉ. दीपा जलाल, डॉ. हेम जोशी, डॉ. बीसी पांडे, डॉ. प्रकाश पंत मौजूद थे। संचालन गोपाल सिंह गैड़ा और डॉ. दीवान नगरकोटी ने संयुक्त रूप से किया।
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