अल्मोड़ा। जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान में कुमाऊंनी लोक संस्कृति को समृद्ध बनाने के लिए दो दिवसीय कुमाऊंनी लोक गीत कार्यशाला शुरू हो गई है। डायट के प्राचार्य डॉ. राजेंद्र सिंह ने कहा कि लोक गीतों के माध्यम से शिक्षण अधिगम प्रक्रिया को सरल किया जा सकेगा।
उन्होंने कहा कि डायट में कुमाऊंनी लोक गीत से संबंधित प्रार्थना का भी गायन किया जाता है। कुमाऊंनी पत्रिका पहरु के संपादक डा. हयात सिंह रावत ने कहा कि कुमाऊं के लोकप्रिय लेखकों और कवियों के प्रेरणादायक लोकगीतों का विद्यालय में गायन किया जाना चाहिए। लोक गीत से संबंधित विभिन्न विधाओं से प्रतिभागियों को अवगत कराया। बाल प्रहरी के संपादक उदय किरौला ने कहा कि विद्यालयों में प्रसिद्ध लोग गायक हीरा सिंह राणा, गिरीश तिवारी (गिर्दा) के गीतों का गायन किया जाए।
कार्यशाला के संयोजक गोपाल सिंह गैड़ा ने कहा कि कुमाऊंनी, गढ़वाली लोक गीतों और कहानियों से संबंधित साहित्य का निर्माण पूर्व में राज्य सरकार द्वारा संग्रहीत किया जा चुका है। जिसे कार्यरूप में परिणित किया जाना है।
राष्ट्रीय पाठ्य चर्चा के आधार पर शिक्षक को स्थानीय लोक भाषा और लोकगीतों का ज्ञान आवश्यक है। इससे शिक्षण प्रक्रिया को सरल बनाया जा सकेगा। बताया गया कि कार्यशाला के बाद लोक गीतों का संग्रह कर पुस्तक भी प्रकाशित की जाएगी। कार्यशाला में डॉ. बृजेश डसीला, डॉ. धारा बल्लभ पांडे, डॉ. इंदिरा पांडे, आनंद पांडे, रमा वर्मा, माया रावत, कमला बिष्ट, कृपाल सिंह, आशा भट्ट, आशा कुमैया, शंकर प्रसाद टम्टा, भावना पांडे, डॉ. नवीन जोशी, किशोरी लाल आदि उपस्थित थे।