अल्मोड़ा। पर्यटन विभाग की ओर से चलाई जा रही दीनदयाल मातृ पितृ तीर्थाटन योजना जिले में फ्लाप साबित हो रही है। पर्यटन विभाग की ओर प्रचार प्रसार करने के बाद भी बीते दो सालों में यात्रा के लिए एक भी यात्री आगे नहीं आया है।
वर्ष 2014 में प्रदेेश की कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में योजना का नाम मेरे बुजुर्ग मेरे तीर्थ रखा गया था। उसके बाद सरकार बदलने पर वर्ष 2017 में योजना दीनदयाल मातृ पितृ तीर्थाटन योजना के नाम से चलने लगी। योजना के तहत यह यात्रा 60 वर्ष से अधिक आयु वर्ग के नागरिकों के लिए निशुल्क रखी गई है। इसका लाभ लेने के लिए यात्री को उत्तराखंड का स्थायी निवासी होना अनिवार्य है। पर्यटन कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार पिछले दो वर्षों में जिले में किसी ने भी यात्रा के लिए आवेदन नहीं किया है।
इन तीर्थों की होती है यात्रा
योजना के तहत वरिष्ठ नागरिकों को बद्रीनाथ धाम, मीठा रीठा साहिब, नानकमत्ता, कलियर शरीफ, ताड़केश्वर, कालीमठ, जागेश्वर, गैराड़ गोलू मंदिर, गंगोलीहाट स्थित महासूर देवता, पौड़ी में हनोल कालिका और ज्वाल्पा में किसी एक धाम की निशुल्क यात्रा कराई जाती है।
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कोट = यात्रा का काफी प्रचार प्रसार किया गया है। तीर्थ यात्रियों का चयन प्रथम आवत प्रथम पावत के आधार पर किया जाएगा। हालांकि अभी किसी भी यात्री ने आवेदन नहीं किया है। - राहुल चौबे, जिला पर्यटन अधिकारी