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पांच साल में भी ऑनलाइन नहीं हो सके उपभोक्ताओं के राशनकार्ड 15-06-29

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अल्मोड़ा। जिले में राशनकार्ड ऑनलाइन का काम 2014 से चल रहा है, लेकिन पांच साल पूरे होने को हैं अभी तक सभी उपभोक्ताओं के राशनकार्ड ऑनलाइन नहीं हो पाए हैं। करीब डेढ़ लाख से अधिक राशनकार्ड धारकों में से हजारों कार्ड धारक ऐसे हैं जिनके कार्ड ऑनलाइन नहीं हुए हैं। वहीं दूसरी तरफ गल्ला विक्रेताओं को भी लैपटाप समेत अन्य उपकरण उपलब्ध नहीं हो पाए हैं। जिससे राशनकार्ड धारकों को अंगूठे के निशान से राशन उपलब्ध कराने की योजना भी पूरी नहीं हो पाई है।
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जिले में एक लाख 60 हजार राशनकार्ड धारक हैं। केंद्र की योजना के तहत सभी राशनकार्डों को 2014 से ऑनलाइन कराने का काम शुरू किया गया। लेकिन अभी तक सभी राशनकार्ड ऑनलाइन नहीं हो पाए हैं। डीएसओ जगदीश वर्मा का कहना है कि करीब आठ से दस हजार कार्ड अभी और ऑनलाइन होने हैं। उन्होंने बताया कि कई राशनकार्ड धारकों ने आधार कार्ड नहीं बनाए हैं जिससे उनके कार्ड ऑनलाइन होने में दिक्कत आ रही है।

इसके अलावा अन्य पहचान पत्र भी उपलब्ध नहीं होने से काम अधूरा है। उन्होंने बताया कि ब्लॉकों में कार्ड ऑनलाइन का काम तेजी से चल रहा है। संभवतया मार्च तक जिले में सभी राशनकार्ड ऑनलाइन कर दिए जाएंगे। इधर सरकारी सस्ते गल्ले की दुकानों में राशनकार्ड स्वामी को मशीन में अंगूठा लगाने के बाद राशन उपलब्ध कराने की योजना भी पूरी नहीं हो सकी है।
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देहरादून से पर्याप्त पीओएस मशीन नहीं मिलने से अभी तक जिले में 917 सस्ता गल्ले की दुकानों में से केवल साढ़े तीन सौ गल्ला विक्रेताओं को ही पीओएस मशीन मिल सकी है। डीएसओ ने बताया कि जब तक सभी गल्ला विक्रेताओं को पीओएस मशीन नहीं मिल जाती कार्डधारकों को पूर्व की प्रक्रिया के अनुसार ही राशन उपलब्ध कराया जा रहा है।
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