चौखुटिया (अल्मोड़ा)। भगोती से लालूरी, कनोली और टिम्टा को बनने वाली सड़क आखिर कहां अटक गई। संबंधित क्षेत्रों के लोग पिछले कई सालों से आश्वासन की घुट्टी पीते-पीते आजिज आ गए हैं। चारों ओर से हताश लोगों के सब्र का बांध टूट गया है। संबंधित ग्रामीणों के लिए गांव में सड़क न होना एक ऐसी सच्चाई है जिसने उन्हें रुलाकर रख दिया है। अमर उजाला से हुई बातचीत में ग्रामीणों का दर्द साफ झलकता नजर आया कहते हैं कि पलायन उनकी मजबूरी बन गई है। भला गांव छोड़कर कौन जाना चाहता है, परंतु जिन गांवों में कई बीमार सड़क के अभाव में समय पर इलाज न मिलने से असमय ही मौत के मुंह में चले गए वहां बिना सड़क जीवन यापन कैसे किया जाए।
लालूरी की प्रधान गीता शर्मा कहती हैं कि सड़क न होने से मरीजों को लाने ले जाने के साथ ही शादी के मौके पर कई तरह की परेशानियां होती हैं। सड़क के लिए हर तरफ गुहार लगाने के बाद आंदोलन को मजबूर होना पड़ा है। सड़क न होने से गांव में पलायन का ग्राफ बढ़ता जा रहा है। प्रदर्शन में शामिल होने आए नोएडा में रहने वाले कनोली के बुजुर्ग रामदत्त पालीवाल कहते हैं कि वह गांव में रहना चाहते हैं परंतु सड़क न होने से शहर में रहना उनकी मजबूरी बन गई है। कहते हैं निकटवर्ती सभी गांव सड़क से जुड़ चुके हैं, लेकिन उनके गांव की अनदेखी की गई है। दिल्ली विनोद नगर में रहने वाली लालूरी की पुष्पा नेगी कहती हैं कि वह गांव में आते रहती हैं, सेकिन सड़क न होने से नई पीढ़ी गांव में आने को तैयार नहीं है। सड़क निर्माण के लिए हर तरह का संघर्ष करने को तैयार हैं, इसीलिए प्रदर्शन में भाग लेने पहुंचे हैं। लालूरी की गंगा देवी (65) कहती हैं कि सड़क न होने के चलते कोई भी व्यक्ति गांव में अपनी बेटी देने को तैयार नहीं है। कहती हैं कि गांव में रहते कई तरह की दिक्कतें तो हैं हीं सड़क न बनी तो युवाओं की शादी होनी भी मुश्किल हो जाएगी। बताती हैं कि बंदर, सुअरों से भी परेशान हैं। कनोली के मोहन चंद्र पांडे दिल्ली में रहते हैं। कहते हैं कि प्रदर्शन में भाग लेने आए हैं सड़क का निर्माण हुआ तो फिर गांव में ही रहने का विचार है। कहते हैं कि गांव में सड़क बनने तक उनका संघर्ष जारी रहेगा। इसी तरह की बात अन्य लोगों ने भी कही है।
कई बीमार सड़क के अभाव में इलाज न मिलने से असमय तोड़ चुके दम
ग्रामीणों ने बयां किया दर्द