अल्मोड़ा। आर्य समाज के वैदिक प्रचारक आचार्य आशीष दर्शनाचार्य ने कहा है कि वैदिक जीवन पद्धति से जुड़कर मानव जीवन का उत्थान संभव है। उन्होंने कहा कि बच्चों को अंधविश्वास से दूर रखने के लिए जागरूक करना होगा।
आचार्य दर्शनाचार्य यहां राजकीय संग्रहालय सभागार में पत्रकारों से वार्ता कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड देवभूमि है। यहां आकर भारतीय संस्कृति को समझा जा सकता है।
उन्होंने कहा कि बच्चों और युवाओं को योग, ध्यान के माध्यम से एकाग्र होने की जरूरत है। बच्चों को अंधविश्वास से दूर रखना होगा। उन्होंने कहा कि वह कुमाऊं भ्रमण पर निकले हैं और युवाओं को व्यक्तित्व विकास, जीवन मूल्यों, अनुशासन, स्वस्थ जीवन जीने, मानसिक तनाव से दूर रहने की जानकारी दे रहे हैं।
उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में सभी को वेद और दर्शन विधा को समझने की जरूरत है।
प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में उतार चढ़ाव आते रहते हैं, लेकिन व्यक्ति को इनसे घबराना नहीं चाहिए। अनुशासित रहकर जीवन में आगे बढ़ें। युवाओं को स्वच्छ जीवन, अच्छे विचारों के साथ व्यक्तित्व के निर्माण के लिए आगे आना होगा।
वह इसी उद्देश्य से कुमाऊं के भ्रमण निकले हैं और विद्यालयों में जाकर बच्चों को भी जागरूक कर रहे हैं। इस अवसर पर आर्य प्रतिनिधि सभा उत्तराखंड के प्रधान गोविंद सिंह भंडारी, डॉ. जयदत्त उप्रेती, उपपा के केंद्रीय अध्यक्ष पीसी तिवारी, दयाकृष्ण कांडपाल, प्रवीण सिंह आदि मौजूद थे।