अल्मोड़ा। अविभाजित उप्र में रहने के दौरान 1982 में तत्कालीन उप्र सरकार से स्वीकृत कौसानी-डौनी-डोबा-नौघर-लखनी मोटर मार्ग का निर्माण कार्य 35 साल बाद भी शुरू नहीं हो सका है। सड़क नहीं बनने से क्षेत्र की करीब दस हजार की आबादी को यातायात सुविधा का लाभ नहीं मिल पा रहा है। ग्रामीणों ने मोटर मार्ग का निर्माण कार्य शीघ्र शुरू नहीं होने पर आंदोलन की धमकी दी है।
पूर्व वन क्षेत्राधिकारी एमएस नयाल ने बताया कि उत्तराखंड राज्य बनने के बाद 2005 में एनडी तिवारी सरकार के समय कौसानी-डौनी-डोबा-नौघर-लखनी मोटर मार्ग को पुन: 10 किमी तक स्वीकृति मिली। मार्ग के लिए 1.39 करोड़ की वित्तीय स्वीकृति दी गई। ग्रामीणों का आरोप है कि कार्यदायी संस्था पीएमजीएसवाई सिंचाई खंड बागेश्वर ने मार्ग का सर्वेक्षण डौनी से डौबा नौघर तक ही किया, जबकि मोटर मार्ग का सर्वेक्षण लखनी तक किया जाना था। उन्होंने कहा कि मोटर मार्ग के गलत सर्वेक्षण से जहां सरकारी धन की बर्बादी होने की संभावना है वही मार्ग पर पड़ने वाले गांवों वटप्यार, कलूफल्या, बारखों, बगेटिया के लोग यातायात सुविधा से वंचित हो जाएंगे। तीन दशक से अधिक समय से ग्रामीण मोटर मार्ग के निर्माण के लिए संघर्ष करते आ रहे हैं, लेकिन आज तक निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका है।
स्थानीय ग्रामीणों भूपाल सिंह नयाल, गोपाल सिंह नयाल, एमएस नयाल, कृष्ण सिंह बिष्ट आदि ने मोटर मार्ग का निर्माण कार्य शीघ्र शुरू करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि मोटर मार्ग निर्माण के मामले में पीएमजीएसवाई बागेश्वर और बागेश्वर जिला प्रशासन को पूर्व में कई बार अवगत करा चुके हैं, लेकिन पीएमजीएसवाई और जिला प्रशासन बागेश्वर इस ओर उदासीन बना हुआ है।