अदरक की खेती के लिए खेत तैयार हो गए हैं, लेकिन काश्तकारों को बीज के लिए उद्यान विभाग के दफ्तरों में चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। पहाड़ के किसी भी जिले में अभी तक अदरक का बीज नहीं पहुंचा। उद्यान विभाग की लापरवाही किसानों पर भारी पड़ रही है। बाजार में मिलने वाला अप्रमाणिक बीज महंगा तो होता ही है, इसकी गुणवत्ता भी ठीक नहीं होती। इसकी फसल अक्सर खराब हो जाती है। इन हालात में काश्तकारों में आक्रोश पनप रहा है।
अल्मोड़ा के हवालबाग, भैंसियाछाना, ताड़ीखेत, द्वाराहाट, चौखुटिया, धौलादेवी, लमगड़ा, ताकुला आदि ब्लाकों में 240.47 हेक्टेयर क्षेत्र में अदरक की खेती होती है। उद्यान विभाग द्वारा जिले के 11 ब्लाकों में स्थित 34 उद्यान सचल केंद्रों के माध्यम से पचास फीसदी छूट पर काश्तकारों को अदरक बीज उपलब्ध कराया जाता है। बागेश्वर में भी यही हालात हैं। किसानों का कहना है कि अदरक बीज की बुआई मार्च महीने से प्रारंभ हो जाती है लेकिन अब तक जिले में उद्यान विभाग के पास अदरक बीज नहीं पहुंचा है।
पिथौरागढ़ जिले में 120 हेक्टेयर क्षेत्र में अदरक बोया जाता है। यहां 400 क्विंटल बीज की जरूरत है, लेकिन उद्यान विभाग ने मात्र 200 क्विंटल बीज की डिमांड भेजी है।
चंपावत में 380 हेक्टेयर में खेती होती है। बीते साल 3905 मीट्रिक टन पैदावार हुई थी। सूखीढांग, अमोड़ी, धौन, स्वांला आदि मुख्य उत्पादक क्षेत्र है। पूरी तरह जैविक होने के अलावा यहां का अदरक खराब नहीं होता। इसे तीन से पांच महीने तक सुरक्षित रखा जा सकता है। अब किसानों को बाजार से 350 रुपए क्विंटल की दर से अप्रमाणिक बीज खरीदना पड़ रहा है।
मांग बढ़ने से
उद्यान विभाग के अधिकारियों का तर्क है कि इस बार अदरक का बीज 92.40 रुपए प्रति किलो की दर पर पहुंच गया है। पिछले साल तक यह 50 से 60 रुपए में मिल जाता था। कीमत बढ़ने और मांग के अनुसार सप्लाई न होने के कारण बीज की मात्रा कम हो सकती है।