...साहब वहां कई लोग भूखे-प्यासे तड़प रहे हैं। सभी के पास पैसे नहीं हैं कि वह पांच गुना कीमत पर भोजन और पानी खरीद सकें। जो सेना के कैंप में पहुंच गए हैं उन्हें ही खाना नसीब हो रहा है।
पहाड़ में बीस से तीस किमी पैदल चलने से शरीर टूट गया है। दून पहुंचने के लिए बार-बार गुहार लगा रहे हैं, लेकिन कोई सुनने वाला नहीं है। दूसरी ओर कई ऐसे भी हैं जो होटलों से निकलकर हेलीकाप्टर में बैठ रहे हैं और दून आ जा रहे हैं।
करीब एक दर्जन चॉपर उतरे
शनिवार को सहस्रधारा हेलीपैड पर बदरीनाथ और गंगोत्री से आए करीब एक दर्जन चॉपर उतरे। इनमें केवल चार में ही ऐसे लोग आए जो पीड़ित दिखाई दे रहे थे। बाकी परिवार ऐसे थे जिनमें से कई खुद ही कह रहे थे कि उन्हें ज्यादा परेशानी नहीं हुई।
वह होटलों में ठहरे थे, केवल सड़क मार्ग खुला नहीं होने की वजह से चॉपर से आए हैं। नागौर राजस्थान की पार्वर्ती देवी और इंदौर के बालचंद का 8 सदस्यीय गरीब परिवार दून आया।
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अलावा तीस किमी पैदल चलने के बाद लखनऊ निवासी सुशीला अवस्थी को चॉपर से उतरते ही उल्टी आ गई थी। इन गरीब परिवारों ने बताया कि उनके जैसे सैकड़ों लोग अभी फंसे हैं।
नेताओं का घेराव कर रहे हैं
शनिवार को आठ चॉपर में वीआईपी और होटल में सुरक्षित रहने वाले लोग आए। दो चॉपर से तो निजी हेलीकाप्टर कंपनियां पहाड़ में बने अपने हेलीपैड का स्टाफ लेकर आई। हैलीपैड पर मौजूद कई लोग इस भेदभाव की बात कर रहे हैं और नेताओं का घेराव कर रहे हैं। खेल मंत्री दिनेश अग्रवाल को भी लोगों के विरोध का सामना करना पड़ा।