आधुनिक तकनीक तक युवाओं की पहुंच बढ़ने के साथ ही इससे जुड़े अपराधों में भी उनकी भागीदारी बढ़ रही है।
प्रदेश में आईटी एक्ट के तहत दर्ज मामलों में गिरफ्तार लोगों में 30 वर्ष से कम उम्र के युवकों की संख्या 55 से 60 प्रतिशत तक है।
इतना ही नहीं लखनऊ सहित प्रदेश भर में साइबर अपराधों में बीते सिर्फ एक वर्ष में ढाई गुना बढ़त दर्ज की गई है।
हो सकती है 3 से 7 साल की जेल
भले ही ये अपराध छोटी-मोटी हैकिंग, फ्रॉड और टैंपरिंग से जुड़े हैं, लेकिन इनकी वजह से इन युवाओं पर उम्रभर का दाग लग रहा है।
आईटी एक्ट के तहत इन युवाओं को 3 से 7 वर्ष की सजा हो सकती है।
क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स
एंटी साइबर क्राइम एक्सपर्ट सुमित सिंह बताते हैं कि प्रदेश की पुलिस सेवा में बड़ी संख्या में कंप्यूटर साक्षर पुलिसकर्मियों की कमी है।
उसे दूर करने में नई जेनरेशन उपयोगी संसाधन बन सकती है। जरूरत इस बात की है कि रिक्रूटमेंट के दौरान कंप्यूटर साक्षरता को भी महत्व दिया जाए।
वहीं ई-मेल भेजने, आईपी पकड़ने जैसी बेसिक ट्रेनिंग के लिए बड़े स्तर पर पुलिसकर्मियों को प्रदेश भर से लखनऊ बुलाने की आवश्यकता न पड़े।