राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना की जांच में बनारस के कई निजी अस्पतालों में ‘खेल’ सामने आया है। पता चला है कि इन अस्पतालों ने बिना इलाज किए ही करीब 78 लाख बीमा धन का भुगतान करा लिया। यह वे अस्पताल हैं जो राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना में पंजीकृत तक नहीं थे और न ही उसकी सूची में शामिल थे।
केंद्र सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव की अगुवाई में आयी टीम ने इन अस्पतालों की जांच में यह खुलासा किया है। जांच टीम ने बीमा कंपनी से भी इस ‘खेल’ पर जवाब मांगा है। वहीं प्रदेश सरकार ने जिलाधिकारी वाराणसी को इसकी जांच सौंप दी है।
केंद्रीय जांच टीम ने वाराणसी के अस्पतालों का दौरा कर वहां राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना में चल रही गड़बड़ी को पकड़ा था। टीम ने बीती 18 और 19 जनवरी को कई अस्पतालों का दौरा किया था। जांच टीम की अगुवाई केंद्रीय संयुक्त सचिव एसके त्रिपाठी कर रहे थे। टीम में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय केसलाहकार डा.वीके कपूर भी मौजूद थे।
इन लोगों ने अपनी जांच में पाया कि वाराणसी केचेतना नर्सिंग होम, सिटीजन आइडियल सर्जिकल सेंटर, ममता नर्सिंग होम, काशी हास्पीटल, नवजीवन नर्सिंग होम, पीस प्वाइंट हास्पीटल लिमिटेड, पापुलर मेडिकेयर लिमिटेड, प्रसाद हास्पीटल, रियल रिलायंस हास्पीटल, श्यामा इंडिया हास्पीटल, वेल केयर हास्पीटल और यश हास्पीटल के करीब 7250 क्लेम बीमा कंपनी ने पास कर दिए।
बीमा कंपनी ने 78 लाख का भुगतान कर दिया। यह भुगतान ओरियंटल बीमा कंपनी ने किया था। संयुक्त सचिव ने बीमा कंपनी को नोटिस देकर इस भुगतान के बारे में जवाब मांगा है। वहीं जांच टीम ने अस्पतालों को मानकों पर भी परखा। इसमें भी 58 में से 37 अस्पताल मानकों पर खरे नहीं पाए गए हैं।
इन अस्पतालों को अभी काम करने से रोक दिया गया है। वहीं मानकों से निम्न पाए गए चार अस्पतालों को अलग से नोटिस दी गई है। वहीं प्रदेश सरकार ने केंद्र सरकार की रिपोर्ट आने केबाद जिलाधिकारी वाराणसी को इन अस्पतालों में गड़बड़ी की रोकथाम को लिखा है। साथ ही पूरे मामले की पड़ताल को निर्देशित किया है।