पचास साल की उम्र में होनी वाली बीमारी लकवा (पैरालिसिस) अब युवाओं को भी अपनी चपेट में ले रही है। बीएचयू अस्पताल में हर दिन 20 से 25 मरीज पहुंच रहे हैं, जिनकी उम्र 40 से कम है।
आईएमएस बीएचयू के न्यूरोलॉजी विभाग की ओपीडी और इमरजेंसी मिलाकर रोज 80 से 100 मरीज लकवा की शिकायत लेकर पहुंच रहे हैं। किसी के शरीर का कोई हिस्सा काम नहीं कर रहा तो कोई कमर से ऊपर वाले हिस्से के काम न करने से परेशान है। न्यूरोलॉजी विभागाध्यक्ष के प्रो. विजयनाथ मिश्र का कहना है कि इन मरीजों में 40 साल से कम उम्र वालों की संख्या हर दिन 20 से 25 रहती है। जो कि चिंता का विषय है। इसकी मुख्य वजह बदलती जीवन शैली है। इसका सबसे बड़ा कारण नशा है। अधिक नशा करने का असर मस्तिष्क पर पड़ता है। नस भी धीरे-धीरे कमजोर होने लगती हैं। इन मरीजों को नशा छोड़ने की सलाह दी जा रही है। इस बीमारी पर हिंदी और भोजपुरी में शॉर्ट फिल्म बनाकर लोगों को जागरूक किया जा रहा है।
नियमित दवा का सेवन न करना भी वजह
प्रो. विजयनाथ मिश्र का कहना है कि लकवा के मरीजों को नियमित दवा लेनी चाहिए। मरीज कुछ दिन दवा लेने के बाद छोड़ देते हैं। बीमारी बढ़ने की सबसे बड़ी वजह यह है। सभी को समय से ब्लड प्रेशर की जांच कराने, नियमित दवा लेने की सलाह दी जा रही है। लकवा ऐसी बीमारी है कि अगर समय से संभल गए तो बचा जा सकता है नहीं तो पूरा शरीर बेकार हो जाता है।
कारण
मस्तिष्क में चोट के कारण खून जमना
आहार-विहार सही न होना
मिर्गी, माइग्रेन, हिस्टीरिया डायबिटिक होना
लक्षण
एक वस्तु दो दिखाई देना
चक्कर आना और कमजोरी महसूस होना
बोलने की क्षमता घटना, अस्पष्ट बोलना
चेहरे की विकृति, मुंह का टेढ़ापन
इच्छानुसार अंगों का काम न करना
उपाय
रीढ़ की हड्डी की मजबूती
नशे का सेवन न करना
मांसपेशियों में कमजोरी पर चिकित्सक की सलाह लेना चाहिए
वायरल इंफेक्शन से खुद को बचाए रखना चाहिए