योजना के शुभारंभ के दिन मंत्री व विधायकों ने लगाए थे आरोप
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प्रदेश सरकार के समाजवादी पेंशन की जांच की घोषणा पर अधिकारियों के हाथ-पांव फूलने लगे हैं। हालांकि शासन की ओर से अभी कोई पत्र नहीं मिलने का दावा विभागीय अधिकारी की ओर से किया जा रहा है।
वर्ष 2012-13 में समाजवादी पेंशन योजना की शुरुआत तत्कालीन अखिलेश सरकार ने की थी। पेंशन के लिए पात्रता का निर्धारण करते हुए शासन की ओर से जिले के लिए कुल 66 हजार का लक्ष्य भी निर्धारित किया गया। हालांकि इसकी प्रक्रिया शुरु होने में महीनों लग गए और वर्ष 2013 में लाभार्थियों के चयन की कार्रवाई शुरु हुई और साल के अंत तक इसे अंतिम रूप दिया जा सका।
योजना के तहत जिले में कुल एक लाख 12 हजार लोगों ने आवेदन किया था लेकिन जांच के बाद लक्ष्य के सापेक्ष 62 हजार लाभार्थियों का ही चयन किया गया। चयन की कार्रवाई के बाद लगातार योजना में धांधली होने के आरोप लगते रहे।
जनवरी 2014 में समारोह का आयोजन कर समाजवादी पेंशन योजना का शुभारंभ जिले में किया गया। आलम यह रहा कि टाउन हाल में आयोजित समारोह में मंच पर सत्ता पक्ष के विधायकों के साथ ही कैबिनेट मंत्रियों ने योजना में धांधली होने की बात कही।
मंत्रियों ने तो यहां तक कहा कि बार-बार निर्देश देने के बाद भी जांच नहीं करना प्रशासन की लापरवाही है। इस आरोप के चलते मंच पर मौजूद तत्कालीन डीएम यशवंत राव काफी देर तक असहज रहे। समारोह के अगले दिन डीएम ने जांच के आदेश देते हुए लाभार्थियों के सत्यापन के लिए टीम भी बनाई।
जांच में कुछ गड़बड़ियां सामने आईं और करीब दो हजार लाभार्थियों के पेंशन राशि को रोक दिया गया। लेकिन इसके बाद भी मामला नहीं थमा और सिकंदरपुर के विधायक मो. रिजवी लगातार योजना में धांधली होने की कहते रहे और यहां तक उन्होंने विधानसभा में भी आवाज उठाई।
इसके बाद फिर जांच शुरु हुई तो बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा सामने आया। जांच में तीन हजार से अधिक अपात्र पाए गए। इसके अलावा बांसडीह के अल्पसंख्यक विहीन गांव देवडीह में 18 अल्पसंख्यकों के नाम पर समाजवादी पेंशन जारी किया गया था।
95 हजार के सापेक्ष 90 हजार के खाते में ही पहुंचती है राशि
वर्ष 2012-13 में समाजवादी पेंशन योजना लागू हुई और जिले के लिए कुल 66 हजार का लक्ष्य निर्धारित किया गया। लेकिन समय-समय पर इसके लक्ष्य में बढ़ोतरी होती गई वर्ष 2016-17 यह लक्ष्य कुल 95 हजार कर दिया गया। वर्तमान में समाज कल्याण विभाग की ओर से 95 हजार लाभार्थियों का समाजवादी पेंशन स्वीकृत किया गया है लेकिन 90 हजार लाभार्थियों के ही खाते में धनराशि पहुंचती है। जिला समाज कल्याण अधिकारी की मानें तो पीएफएमएस व खाता का रिस्पांस नहीं मिलने के कारण इन लाभार्थियों की पेंशन राशि खाते में नहीं पहुंच पाती है।
यह निर्धारित किया गया था मानक
समाजवादी पेंशन के लिए शासन की ओर से बाकायदे मानक का निर्धारण किया गया था। मानक में तय किया गया था कि ऐसे लाभार्थियों का चयन किया जाएगा जो सरकार के किसी अन्य योजना जैसे वृद्धा, विधवा, विकलांग पेंशन, बीपीएल या अन्त्योदय कार्ड आदि से आच्छादित न किए गए हों। इसके अलावा लाभार्थी गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करता हो और उसके जमीन, जायदाद, वाहन आदि न हो। लेकिन अधिकारियों व कर्मचारियों ने मानक को ताक पर रखकर लाभार्थियों की चयन किया। सूत्रों की मानें तो सही तरीके से जांच हो जाए तो करीब 70 फीसदी लाभार्थियों की पेंशन खटाई में पड़ सकती है।