गंगा में जल परिवहन के प्रधानमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट को रफ्तार देने के लिए प्रदेश सरकार ने कमर कस ली है। सीएम योगी आदित्यनाथ के बनारस दौरे के दौरान इसका खाका खींचा गया।
प्रदेश सरकार जल्द ही वाटर ट्रांसपोर्ट निदेशालय का गठन कर सकती है या फिर परिवहन के अंतर्गत ही इसकी अलग शाखा बना सकती है। शनिवार को यहां सर्किट हाउस में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की जल परिवहन से जुड़े अधिकारियों की घंटे भर चली बैठक के बाद ऐसे ही संकेत सामने आए हैं।
भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण (आईडब्ल्यूएआई) के अधिकारियों ने इलाहाबाद-हल्दिया जलमार्ग प्रोजेक्ट पर योगी के सामने प्रेजेंटेशन भी दिए।करीब घंटे भर तक चले प्रेजेंटेशन में योजना से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। पूर्ववर्ती सपा सरकार के दौरान कछुआ सेंक्च्युरी सहित जिन बिंदुओं पर गतिरोध की स्थिति थी, उन पर सहमति बनी।
आईडब्ल्यूएआई से जुड़े सूत्रों के मुताबिक गंगा सहित प्रदेश की अन्य नदियों में जल परिवहन की संभावना और इसके विकास के लिए इनलैंड वाटर ट्रांसपोर्ट (आईडब्ल्यूटी) का निदेशालय बनाने पर मुख्य सचिव राहुल भटनागर ने सकारात्मक संकेत दिए हैं।
सदस्य आईडब्ल्यूएआई और प्रोजेक्ट डॉयरेक्टर प्रवीर पांडेय ने प्रेजेंटेशन के दौरान गंगा में वाराणसी से हल्दिया तक चल रहे विकास कार्यों को बताया। गंगा में जल परिवहन शुरू होने के बाद बनारस सहित कई क्षेत्रों का न केवल हल्दिया बल्कि इसके माध्यम से कई देशों से सीधे जुड़ जाने के फायदे और संभावनाएं भी बताईं।
मुख्यमंत्री ने पूछा, इतने कम पानी में बड़े जहाज कैसे चलेंगे
yogi in varanasi
- फोटो : अमर उजाला
टर्मिनल व अन्य विकास कार्यों के लिए जमीन अधिग्रहण की समस्या भी बताई। मुख्य सचिव ने इसके समाधान का भरोसा दिलाया। कछुआ सेंक्चुअरी में जहाज चलाने की अनुमति से जुड़ी वर्ल्ड वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट की रिपोर्ट आगे बढ़ाने के लिए धन्यवाद ज्ञापित किया गया।
आईडब्ल्यूएआई के चेयरमैन नूतन गुहा विश्वास ने सभी का स्वागत किया। बैठक में सदस्य तकनीकी संजय कुमार गंगवार, मुख्य इंजीनियर रविकांत, निदेशक एके मिश्रा आदि मौजूद रहे।
मुख्यमंत्री ने प्रेजेंटेशन के दौरान सवाल उठाया कि गंगा में इतने कम पानी में बड़े-बड़े जहाज कैसे चलेंगे? इस पर आईडब्ल्यूएआई के अधिकारियों ने बताया कि वे ऐसा जहाज डिजाइन (जर्मनी की कंपनी जीएसटी कर रही डिजाइन) करा रहे हैं, जो कम पानी में भी आ-जा सकेंगे। इनकी क्षमता दो हजार टन के लगभग होगी। साथ ही गंगा में कराई जा रही ड्रेजिंग की भी जानकारी दी।
जितनी जरूरत, उतनी अनुमति
आईडब्ल्यूएआई ने कछुआ सेंक्चुअरी में क्रूज और मालवाहक जहाजों के प्रवेश की अनुमति में पूर्ववर्ती सरकार के दौरान आईं दिक्कतों की जानकारी दी। कहा कि वे कछुआ सेंक्चुअरी में जहाजों का संचालन नियम और शर्तों के साथ करना चाहते हैं ताकि किसी जलीय जीव को कोई नुकसान न हो। इस पर शासन ने उन्हें विश्वास दिलाया कि जितनी आवश्यकता होगी, उतनी अनुमति मिलेगी।