दुर्गा मंदिर दुर्गाकुंड में चल रहे चंडी महायज्ञ के चौथे दिन देशभर से आए भक्तों ने वैदिक मंत्रोच्चार से यज्ञशाला में आहुतियां डालीं। मंदिर के महंत पं. रमेश दुबे ने कहा कि चंडी उस शक्ति का प्रतिनिधित्व करती है, जो ब्रह्मांडीय प्रलय के समय समस्त सृष्टि को विलीन कर देती है। उन्होंने कहा कि यह सृजन, संरक्षण और विनाश की पूर्णता का प्रतीक है। दुर्गा सप्तशती पाठ में चंडी की उपासना का सर्वोत्तम उपाय चंडी पाठ (देवी महात्म्य) है। चंडी माता के स्मरण से संकट से रक्षा होती है। यज्ञशाला में 21 वैदिक ब्राह्मणों ने शक्ति मंत्रोच्चार द्वारा आहुतियां दीं। भजन गायकों ने सुमधुर भजनों से मां की महिमा का बखान किया। श्रद्धालुओं में प्रसाद वितरित हुआ।