भगवान नरसिंह के प्राकट्योत्सव पर वैशाख शुक्लपक्ष की चतुर्दशी तिथि 25 मई को मनाया जाएगा। कोरोना संक्रमण के कारण भक्त भगवान नरसिंह का दर्शन और गंगा स्नान नहीं कर सकेंगे। इसलिए घर पर ही पूजन का अनुष्ठान आयोजित किया जाएगा।
ज्योतिषाचार्य पं. गणेश प्रसाद मिश्र ने बताया कि भगवान विष्णु के 10 अवतार में चौथा अवतार भगवान नरसिंह का है। पद्म पुराण और अन्य धर्म ग्रंथों के अनुसार वैशाख महीने के शुक्लपक्ष की चतुर्दशी तिथि पर भगवान नरसिंह भक्त प्रह्लाद की रक्षा के लिए प्रकट हुए थे। उनकी पूजा करने से हर तरह की इच्छा पूरी होती है। इसके साथ ही बीमारियां खत्म होती है और दुश्मनों पर जीत मिलती है। पुराणों के अनुसार इस पर्व पर व्रत, दान और पूजा करने से मोक्ष की प्राप्ति भी होती है।
घर पर ही करें गंगा स्नान
इस दिन सुबह जल्दी उठकर तीर्थ स्नान किया जाता है। महामारी के कारण अभी यह संभव नहीं है, इसलिए घर पर ही पानी में गंगाजल डालकर नहा लेना चाहिए। इस दिन नदी, तालाब या घर पर ही वैदिक मंत्रों के साथ मिट्टी, गोबर, आंवले का फल और तिल लेकर उनसे सब पापों की शांति के लिए विधिपूर्वक स्नान करना चाहिए। इसके बाद पूरे घर में गंगाजल या गौमूत्र का छिड़काव करना चाहिए। फिर भगवान विष्णु के नरसिंह रूप की पूजा करनी चाहिए। पूजा से पहले ही पूरे दिन व्रत और श्रद्धा अनुसार दान देने के लिए संकल्प लेना चाहिए। व्रत में दिनभर गुस्सा नहीं करना चाहिए और नहीं सोना चाहिए। एक समय ही भोजन करना चाहिए। शाम को सूर्यास्त के पहले नहाकर फिर भगवान नरसिंह की विशेष पूजा और अभिषेक करें। इसके बाद प्रसाद बांटे।
पूजा की विधि
नृसिंह चतुर्दशी की सुबह जल्दी स्नान आदि करने के बाद व्रत के लिए संकल्प लें। इसके बाद संध्या समय पूजा स्थान पर चावल रखकर उनपर कलश स्थापित करें। कलश पर या पास में ही भगवान नरसिंह की मूर्ति या तस्वीर रखें। पंचामृत, दूध और गंगाजल से भगवान नरसिंह का अभिषेक करें। इसके बाद चंदन चढ़ाएं फिर सभी तरह की पूजन सामग्री चढ़ाएं। भगवान नरसिंह को चंदन, कपूर, रोली व तुलसीदल अर्पित करें। फिर धूप-दीप दिखाएं। भगवान को भोग लगाएं और आरती करें। इसके बाद सभी को प्रसाद बांट दें और उसके बाद खुद प्रसाद लें।