Varanasi News: हाईपरबेरिक ऑक्सीजन काफी हद तक घावों को ठीक कर देता है। साथ ही संक्रमण के खतरे को भी यह कम करता है। हर साल आज ही के दिन यानी 17 अक्टूबर को विश्व ट्रॉमा दिवस मनाया जाता है। आइए जानते हैं अन्य जानकारियां...
सड़क दुघर्टना, छत से गिरने पर लगने वाली चोट और अन्य घटनाओं में घायल ट्रॉमा के मरीजों के इलाज में हाईपरबेरिक ऑक्सीजन थेरेपी से राह आसान हो रही है। इससे घाव तेजी से ठीक हो रहा है। वहीं, इलाज के दौरान संक्रमण का भी खतरा कम होता है। डॉक्टरों के साथ ही पैरामेडिकल स्टाफ को भी प्रशिक्षित किया जा रहा है। हर साल 17 अक्तूबर को विश्व ट्रॉमा दिवस मनाया जाता है।
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बीएचयू के ट्रॉमा सेंटर में इस समय 354 बेड है। दिसंबर 2023 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गंभीर मरीजों के लिए 150 बेड वाले क्रिटिकल केयर ब्लॉक की आधारशिला रखी थी। इसके फाउंडेशन का काम पूरा होने वाला है। ट्रॉमा सेंटर के प्रभारी प्रो. सौरभ सिंह का कहना है कि क्रिटिकल केयर ब्लॉक बनने के बाद कुल बेड की संख्या 500 पहुंच जाएगी। अब तक 1000 मरीजों को हाईपरबेरिक ऑक्सीजन थेरेपी दी गई है।
केंद्र में मस्तिष्क, रीढ़ और नेत्र आघात वाले मरीजों का उपचार हो सकेगा। बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 18 सितंबर 2015 को ट्रॉमा सेंटर का उद्घाटन किया था। अब तक ओपीडी में 18 लाख मरीजों का इलाज हुआ। न्यूरो, प्लास्टिक, आर्थोपेडिक सहित अन्य सर्जरी को मिलाकर 75 हजार से अधिक सर्जरी हो चुकी है। 2023 से अब तक ट्रॉमा सेंटर की ओपीडी में ढाई लाख मरीज आए। 17 हजार से अधिक की सर्जरी की गई है।