विश्व में मानसिक स्वास्थ्य के मुद्दों के बारे में जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से हर साल 10 अक्टूबर को विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस मनाया जाता है। देश दुनिया में मनोरोगियों की संख्या दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। अब 15 से 30 साल के युवा भी इस बीमारी की चपेट में आते जा रहे हैं। इसके कई सारे कारण है। अगर आप भी तनाव से भरी जिंदगी जी रहे हैं और उसे दूर करना चाहते है तो यह खबर आपके बहुत काम आने वाली है। आगे की स्लाइड्स में देखें..
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जब हमारे जिंदगी में सब अच्छा ही अच्छा होता है तो हमें तनाव नहीं होता। जैसे ही हमारे जीवन में सब कुछ उल्टा-पुल्टा होने लगता है या जैसा हम सोचते हैं वैसा नहीं होता तो हमें दुख होने लगता है हमारे जीवन में तनाव रहने लगता है यानी हम टेंशन लेना शुरू कर देते हैं। यह एक स्वाभाविक चीज है। इसमें मानव जीवन की असली परीक्षा होती है।
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मानसिक अस्पताल, मंडलीय अस्पताल में चलने वाली ओपीडी में आने वाले हर दिन 50 मरीजों में आधी संख्या युवाओं की होती है। मनोचिकित्सक इसके पीछे अवसाद, पारिवारिक कलह को वजह बता रहे हैं। इस पर नियंत्रण के लिए स्कूल-कॉलेजों में काउंसिलिंग के अलावा अन्य जागरूकता संबंधी कार्यक्रम भी कराए जा रहे हैं। इस साल मानसिक स्वास्थ्य दिवस (10 अक्तूबर) की थीम भी युवाओं पर ही रखी गई है।
मेडिकल कॉलेजों
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मानसिक अस्पताल पांडेयपुर, बीएचयू अस्पताल, मंडलीय अस्पताल में चल रही मानसिक रोग विभाग की ओपीडी में आने वालों की पहले काउंसिलिंग होती है, जब इसका कुछ असर नहीं दिखता है तो फिर जांच के बाद दवा शुरू की जाती है। मरीजों को तनाव मुक्त रखने के लिए खेलकूद आदि के आयोजन भी कराए जाते हैं। इधर, बीएचयू अस्पताल में मानसिक रोग विभाग की ओपीडी में भी आने वाले मरीजों में युवाओं की संख्या बढ़ी है।
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मनोचिकित्सक प्रो.संजय गुप्ता के अनुसार हर दिन आने वाले 500 में करीब 100 की संख्या युवाओं की रहती है। इसमें कोई अवसाद, तनाव, पढ़ाई, बेरोजगारी तो कोई रिश्ते व पारिवारिक कलह से परेशान है। मानसिक स्वास्थ्य के प्रति अब पहले की तुलना में लोगों में जागरूकता बढ़ रही है। मंडलीय अस्पताल के मनोचिकित्सक डॉ. रवींद्र कुशवाहा मानते हैं कि यहां आने वाले 50 से अधिक लोगों में 50 प्रतिशत युवा ही हैं।
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उन्हें तनावमुक्त जीवन जीने के साथ ही बीमारी पर नियंत्रण के लिए समय से इलाज कराते रहने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। बताया कि बहुत से लोग झाड़ फूंक का सहारा लेते हैं, इससे बचाने के लिए ही दुआ से दवा अभियान शुरू किया गया है। इसमें जांच के बाद लोगों को दवाइयां देने के साथ ही समय-समय पर मानीटरिंग भी की जा रही है।