वाराणसी। हृदय रोग के मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है। यह महज अंदाजा भर नहीं है, इस बात पुष्टि करती है अस्पतालों की ओपीडी में आने वाले मरीजों की संख्या। दिल की परेशानी सिर्फ उम्रदराज लोगों को ही नहीं है, 18 साल से कम उम्र के बच्चे दिल के रोगी होते जा रहे हैं। जिले में 100 ऐसे बच्चे हैं, जिनके दिल में छेद हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक न होने के कारण इनका इलाज स्वास्थ्य विभाग की ओर से कराने की है।
राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत इन बच्चों का चयन भी किया जा चुका है। योजना के तहत जांच के बाद सामान्य बीमारी होने पर जिला और मंडलीय अस्पताल में इलाज कराया जाता है, लेकिन दिल में छेद जैसी गंभीर बीमारी होने पर बच्चों को लखनऊ और दिल्ली ले जाना पड़ता है। अब तक यहां केवल एक बच्चे का इलाज हुआ है, बाकी को इलाज का इंतजार है। जिन बच्चों के दिल में छेद है, उसमें सबसे अधिक 31 बच्चे हरहुआ में मिले हैं। इसके अलावा बड़ागांव, चिरईगांव और आराजीलाइन में भी ऐसे बच्चे मिले हैं। हरहुआ ब्लॉक के दो और बच्चों का ऑपरेशन होना है, जिसकी कागजी कार्रवाई चल रही है।
फोलिक एसिड की कमी है दिल छेद की मुख्य वजह
दिल में छेद जन्मजात होता है। गर्भवती महिलाओं में फोलिक एसिड की कमी इसकी मुख्य वजह है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से महिलाओं को आयरन और फोलिक एसिड के लिए दवा के साथ ही संतुलित आहार लेने के लिए जागरूक किया जाता है। आरबीएसके की ओर से बच्चों की नियमित जांच कराई जा रही है। दिल में छेद वाले बच्चों का स्थानीय स्तर पर इलाज कराने के बाद सीएमओ के सहयोग से ऑपरेशन कराया जाता है। -डॉ. अब्दुल जावेद, नोडल प्रभारी, आरबीएसके हरहुआ
जांच में भी हैं मुश्किलें
बीएचयू और दीनदयाल उपाध्याय अस्पताल को छोड़कर जिले के किसी भी अस्पताल में दिल के छेद की जांच की व्यवस्था नहीं है। इनमें भी दीनदयाल उपाध्याय अस्पताल में इको मशीन होने के बावजूद जांच नहीं हो पा रही है। यहां जांच करने वाला कोई नहीं है। यह समस्या काफी समय से है, लेकिन इस ओर किसी का ध्यान नहीं जा रहा है।
आरबीएसके ने लौटाई अदनान के चेहरे पर खुशी
हरहुआ में कक्षा आठ के छात्र अदनान के दिल में छेद था। परिवार की स्थिति ठीक न होने की वजह से माता-पिता परेशान थे। इस बीच आबीएसके नोडल प्रभारी डॉ. अब्दुल जावेद ने अपनी टीम के साथ विद्यालय पहुंचकर बच्चे की जांच की और उसका ऑपरेशन आरबीएसके के तहत कराने की बात कही। सीएमओ की मदद से उसे कानपुर मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया। 26 अगस्त को ऑपरेशन के बाद वह 30 अगस्त को घर आ गया।
नियमित व्यायाम से बचा जा सकता है
खानपान और अनियमित जीवन शैली की वजह से ही हृदय संबंधी बीमारियां बढ़ रही हैं। नियमित व्यायाम करने से इस बीमारी से बचा जा सकता है। ओपीडी में आने वाले मरीजों को भी नियमित व्यायाम के लिए प्रेरित किया जाता है। बच्चों की सेहत पर अधिक ध्यान देने की जरूरत है। -डॉ. ओमशंकर, हृदय रोग विशेषज्ञ, बीएचयू सर सुंदरलाल अस्पताल
हृदय रोग के लक्षण
0 सीने में दर्द और सांस फूलना
0 हाथों और पैरों में सूजन होना
0 जल्दी थकावट महसूस होना
0 ब्लड शुगर और ब्लड प्रेशर का बढ़ना
बचाव के उपाय
0 खानपान में सावधानी बरतें
0 हरी सब्जियों और फलों का सेवन करें
0 बच्चों को अधिक से अधिक घर से बाहर खेलना चाहिए
0 नियमित व्यायाम जरूर करें।
हृदय रोग के कारण
0 मिलावटी खानपान का अधिक सेवन
0 वायु प्रदूषण का बढ़ना
0 अधिक धूम्रपान