काशी के गंगा घाट अब खुद बताएंगे अपने अतीत की दास्तान, जानिए कैसे...?
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अयोध्या वासियों ने जब जाना कि श्रीराम की बारत लौटकर आ रही है, वे प्रभु और माता सीता के दर्शन के लिए दौड़ पड़े। प्रसन्नता से उनके शरीर पुलकित थे। हर तरफ खुशियां छाई थीं। रामनगर की विश्व प्रसिद्ध रामलीला में शनिवार को जनकपुरी से बरात के विदा होकर अयोध्या आने तक की लीला की गई।
अवधपुर में महारानी कौशल्या सहित तीनों रानियां बेसब्री से पलकें बिछाये बरात आने का इंतजार कर रही थीं। अयोध्यावासी रास्ते पर टकटकी लगाये थे। बरात के अयोध्या पहुंचते ही ढोल नगाड़े बजने लगे। महिलाएं मंगल गीत गाने लगीं। हर तरफ से फूलों की बौछार हो रही थी। माताओं ने पूरे विधि विधान से नववधुओं का परिछन किया। हर तरफ श्री राम की जय जयकार थी।
महल के द्वार पर पालकी का पट खुला तो सामने हाथी पर सवार राज परिवार के अनंत नारायण सिंह ने फूलों की वर्षा की। परिछन के बाद तीनों माताएं वधुओं को महल में ले गयीं। उन्हें सुंदर सिंहासन पर पतियों के साथ बैठाया गया। दशरथ तीनों रानियों से कहते हैं कि अपनी बहुओं को पलक की भांति रखना। ये पराये घर से आई हैं। माता कौशल्या राम से विश्वामित्र मुनि के साथ जाने से लेकर धनुष यज्ञ तक पूरा प्रसंग पूछती हैं।
मुनि विश्वामित्र आश्रम लौटने के लिए राजा दशरथ से विदा मांगते हैं। दशरथ उनसे कहते हैं कि पुत्रों पर सदैव कृपा बनाए रखना और दर्शन देते रहना। विश्वामित्र उन्हें अपना आशीर्वाद देकर प्रस्थान करते हैं। भगवान की आरती के बाद आठवें दिन की लीला को यहां विश्राम दिया जाता है।