500 किलो हर दिन खपत :
बाजार के सूत्रों के अनुसार, जिले भर में रोजाना पांच सौ किलो से ज्यादा पॉलिथिन की खपत होती है। नगर निगम के अफसर भले ही पॉलीथिन के खिलाफ समय-समय पर अभियान चलाने का दावा करते हों, लेकिन पॉलिथीन का प्रयोग धड़ल्ले से किया जा रहा है।
पॉलीथिन बनी गंदगी का प्रमुख कारण :
क्रांति फाउंडेशन के ई राहुल सिंह के अनुसार, जलाए बिना भी पॉलिथीन खतरनाक गैसें जैसे बेंजीन, विनायल और इथनॉल ऑक्साइड का उत्सर्जन कर हवा को विषाक्त बनाती है। पॉलिथीन गंदगी का भी प्रमुख कारण है। इससे सीवरेज सिस्टम भी प्रभावित हो रहा है। पॉलिथीन से नालियां चोक हो रही हैं, जिससे गंदा पानी सड़कों पर बहता रहता है।
रुक जाता है शिशु का विकास :
चिकित्सकों के अनुसार, प्लास्टिक के ज्यादा संपर्क में रहने से खून में थेलेट्स की मात्रा बढ़ जाती है। इससे गर्भस्थ शिशु का विकास रुक जाता है। सीएमओ डॉ वीबी सिंह के अनुसार, पॉलिथीन के जलने से कार्बन डाई ऑक्साइड, कार्बन मोनो ऑक्साइड सहित अन्य विषैली गैसें निकलती होती हैं। इससे सांस और त्वचा संबंधी बीमारियों की आशंका बढ़ जाती है। इनमें खांसी, सांस लेने में दिक्कत, आंखों में जलन, चक्कर आना, मांसपेशियों का शिथिल होना और हृदय रोग प्रमुख हैं।
प्रतिबंध पर कब और क्या हुआ?
पर्यावरण विभाग की ओर से 22 दिसंबर 2015 में जारी अधिसूचना में सभी तरह की पॉलिथीन और कैरी बैग के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाने की बात कही गई। इसी क्रम में केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने 50 माइक्रॉन से कम मोटी पॉलिथीन को पर्यावरण के लिए खतरनाक बताया। 15 जुलाई 2018 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश में 50 माइक्रॉन से कम की पॉलीथिन पर प्रतिबंध लगाया। प्रदेश में पॉलिथीन के प्रयोग पर प्रतिबंध की कवायद वर्ष 2000 में शुरू हुई थी, लेकिन अलग-अलग कानूनों के चलते इस पर अमल नहीं हो सका था। वहीं, नगर विकास विभाग ने वर्ष 2000 में उत्तर प्रदेश प्लास्टिक और अन्य जीव अनाशित कूड़ा-कचरा अधिनियम लागू किया था। इसके तहत 20 माइक्रॉन से कम की पॉलिथीन के उपयोग पर प्रतिबंध है।
आदत बदलें, घर से झोला लेकर निकलें :
पॉलिथीन पर रोक तभी लग सकती है, जब हम खुद इसे अपनी आदत में बदलाव करेंगे। इसकी शुरुआत हमें अपने घर से करनी होगी। जब हम पॉलिथीन के बदले कपड़े के थैले का उपयोग करना शुरू करेंगे तो हालात भी काफी बदल जाएंगे।
नगर निगम चला रहा अभियान :
प्रतिबंधित पॉलीथिन के खिलाफ पिछले एक महीने से नगर निगम की ओर से शहर के सभी जोन में अभियान चलाया जा रहा है। जुर्माने के साथ ही चालान की भी कार्रवाई की जा रही है। इसके कारण दुकानदारों और आम लोगों में जागरूकता आई है।